योगी आदित्यनाथ भाजपा के लिए इतने खास क्यों हुए

केंद्र में दूसरी बार भाजपा की सरकार बनने के बाद इस महीने भारतीय जनता पार्टी की दूसरी राष्ट्रकार्यकारिणी की बैठक हुई।

इस बैठक को आयोजित करने का उद्देश्य था 29 विधानसभा सीटों पर और 3 लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को मनमाफिक सफलता नहीं मिलना।

यह जानने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। इन उपचुनावों को भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका माना गया है।

इसके पीछे का कारण यह है कि अगले साल की शुरुआत मे पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें भी उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है।

उत्तर प्रदेश के बारे में कहा जाता है कि दिल्ली के लिए रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है।

योगी आदित्यनाथ ने पढ़ा राजनीतिक प्रस्ताव

राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक से पहले जब पहली राष्ट्र कार्यकारिणी की बैठक हुई थी।

उस बैठक में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने राजनीतिक प्रस्ताव पढ़ा था।

लेकिन इस बार योगी आदित्यनाथ ने राजनैतिक प्रस्ताव पढ़के सबको चौका दिया।

इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सवाल पूछा गया तब उन्होंने जवाब दिया। जिससे कई सवालों के जवाब इकठ्ठे मिल गए।

सीतारमन ने कहा कि योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता है। भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

कोरोनावायरस महामारी के दौरान उन्होंने बेहद अच्छा काम किया था इसीलिए उनसे राजनैतिक प्रस्ताव पढ़ने के लिए कहा गया।

और बढ़ने की इच्छा

योगी आदित्यनाथ के प्रस्ताव पढ़ने से भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहले भारतीय पार्टी ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि हम एक हैं और हम में कोई मतभेद नहीं है।

पिछले कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी के बारे में चर्चाएं जोरों पर थी कि योगी आदित्यनाथ की केन्द्र के नेताओं से बन रही है।

यहां तक यह कहा जा रहा था कि योगी आदित्यनाथ दिल्ली के नेताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।

इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उत्तर प्रदेश के कई दौरे किए और वे यहां विधायकों नेताओं से मिले।

यह मात्र चर्चाएं नहीं थी बल्कि कई नेताओं ने ऐसे बयान भी दिए थे जिससे ऐसा एहसास होने लगा था कि यूपी में गुटबाजी होने लगी है।

अब बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कोई योगी आदित्यनाथ से प्रस्ताव पढ़वा के संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है।

सारे सीएम एक तरफ योगी आदित्यनाथ एक तरफ

योगी आदित्यनाथ देश में हिंदुत्व चेहरे के रूप में उभरे हैंह योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ हिंदू युवा वाहिनी नाम का संगठन भी चलाते हैं।

जिससे उनका अलग जनाधार भी है। भारतीय जनता पार्टी पर दूसरा हमला कोविड-19 के दौरान अव्यवस्थाओं को लेकर है।

सरकार पर यह आरोप लगे थे कि दूसरी लहर के दौरान प्रदेश में मिसमैनेजमेंट था।

भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने खुलेआम योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोप लगाए और इसके साथ ही सवाल भी उठाए परंतु जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है।

भारतीय जनता पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को अन्य सभी मुख्यमंत्रियों से ज्यादा महत्व दे कर योगी आदित्यनाथ को खुश करने का प्रयास किया है।

चुनाव जीतने की ललक

भले ही कोई यह कहता रहे कि राजनीति में हम केवल जनसेवा के लिए आए हैं लेकिन सच्चाई यह है कि हर कोई चुनाव जीतने के लिए एक मैदान में आता है।

फिलहाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीतने की ललक साफ देखी जा सकती है।

भारतीय जनता पार्टी के बारे में यह देखा जा रहा है कि वह एक चुनाव जीतने के बाद आराम नहीं करती बल्कि दूसरे चुनाव की तैयारियों में जुट जाती है।

पार्टी अभी पीक से बहुत दूर :- जेपी नड्डा

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि भारतीय पार्टी का भी पीक नहीं आया है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए कई टारगेट भी दिए।

इसमें बूथ स्तर पर कमेटी बनाने से लेकर पन्ना प्रमुख बनाने तक के टारगेट सेट है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकर्ताओं पार्टी पदाधिकारी या फिर सांसदों के साथ संवाद में यह जरूर कहते हैं कि लोगों से संपर्क करने का तरीका मत छोड़िए।

राष्ट्र कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कार्यकर्ताओं को जनता और पार्टी के बीच एक पुल का काम करना चाहिए।

नेशनल से आगे निकल कर ग्लोबल टारगेट

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता जिस तरह से पहली लहर में आम जनता की मदद करते नजर आ रहे थे वैसे दूसरी लहर में नहीं हुआ था। दूसरी लहर के दौरान भारतीय जनता पार्टी बहुत देर से एक्टिव हो पाई।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं विधायकों सांसदों से मीटिंग लेकर कहा कि सभी लोगों से मिले और लोगों की समस्याओं का समाधान करें।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिस तरह से चर्चाएं हुई उससे ऐसा देखने को मिल रहा था कि भारतीय जनता पार्टी के लिए किसान आंदोलन को बहुत बड़ी समस्या नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी अपने बिल्कुल स्पष्ट एजेंडे पर ही आगे बढ़ रही है। भारतीय जनता पार्टी 5 साल में अपने काम को लेकर जनता के बीच जाएगी।

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