जब ऑटो चालक ने लौटाया लाखों के गहनों का बैग।

आज हम उस दौर में जी रहे हैं जहां पर पैसे के मामले में हम अपने भाई पर भरोसा नहीं कर पाते।

बात भी सही है किसी जमाने में भाई भाई की बेईमानी कर रहा है उसका हिस्सा खा कर रहा है तो फिर किसी अन्य व्यक्ति पर भरोसा कैसे कर लिया जाए।

लेकिन यह दुनिया इतनी बुरी भी नहीं है जितना बुरा मान लिया गया है। आज के जमाने में भी ऐसे कई ईमानदार लोग हैं जिनके अंदर का ईमान आज भी जिंदा है।

चाहे लाखों की दौलत हो चाहे करोड़ों की किसी और की दौलत को हाथ नहीं लगाते। वे ईमानदारी को ही अपनी सबसे बड़ी संपत्ति मानते हैं।

इस ईमानदारी की एक मिसाल बने ऑटो चालक इन्होंने अपने ऑटो में सवारी के छूटे हुए उस बैग को लौटा दिया जिसमें लाखों का गहने रखे हुए थे। आइए जानते हैं इस घटना की पूरी कहानी क्या है।

ईमानदारी ऐसी चीज है जिसको ना तो खरीदा जा सकता है और ना ही उधार लिया जा सकता है इसे तो बस कमाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के ऑटो चालक ने ईमानदारी की वो मिसाल पेश की जिसको देखकर हर कोई दांतो तले उंगली दबा रहा है।

महेश नाम के ऑटो ड्राइवर की गाड़ी में एक सवारी बैठी और सवारी अपने गंतव्य तक पहुंचने के बाद महेश के ऑटो में अपना बैग छोड़ गई। उस बैग में 7 लाख के गहने और कुछ रुपए भी रखे थे।

जब महेश ने पुलिस की मौजूदगी में उस मालिक का बैग लौटाया तो न केवल बैग मालिक बल्कि शहरवासी भी महेश की ईमानदारी के कायल हो गए।

हुआ यह था की छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर के रहने वाले महेश ऑटो चालक हैं। महेश रोजाना की तरह उस दिन भी ऑटो चला रहे थे।

उस दिन गाजियाबाद के एक सज्जन जगदलपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने आए और घर जाने की जल्दी में वे सज्जन अपना बैग महेश के ऑटो में ही छोड़ आए।

जब शाम को महेश ने अपना फोटो साफ किया तब उसमें बैग को देखकर हैरान रह गए।

उन्होंने जब बैग खोलकर देखा तो उसमें सोना चांदी देखकर उनके और उनकी पत्नी के होश उड़ गए।

दोनों पति पत्नी के समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि आखिर क्या किया जाए।

उन्होंने दिन भर बहुत सारी सवारियों को इधर से उधर पहुंचाया था आखिर कैसे पहचाने कि वह किसका बैग है। सबसे पहले महेश ने उस बैग को सुरक्षित स्थान पर रखा।

उसके बाद अगले दिन महेश उन सभी स्थानों पर गए जहां पर वे पिछले दिन सवारियों को लेकर पहुंचे थे। लेकिन उन्हें कोई जानकारी और पता नहीं मिल पाया।

इसके बाद शाम को महेश फिर घर गए और उन्होंने उस बैग को अच्छी तरह खंगाला तो उन्होंने देखा कि बैग में एक आधार कार्ड पर एक मोबाइल नंबर मिला।

मोबाइल नंबर मिलने के बाद महेश और उनकी पत्नी ने राहत की सांस ली। और उन्होंने उस नंबर पर फोन लगाया, फोन पर बात हुई।

महेश ने अपना सारा मामला उन्हें बता दिया और बताया कि उनका बैग उनके पास सुरक्षित है। वे आएं और आकर यहां से अपना बैग ले जाएं।

इसके बाद सभी लोग थाने में पहुंचे और महेश ने पुलिस के सामने वह बैग बैग मालिक के हाथ में सौंप दिया।

बैग में अपना सारा सामान सुरक्षित देखकर बैग मलिक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

महेश की ईमानदारी से खुश होकर पुलिस ऑफिसर ने उनकी तारीफ की और महेश को 1 शाल पहनाकर और ₹ 5001 की राशि देकर सम्मानित किया।

इतना सम्मान पाकर महेश और उनकी पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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