मलाला ने असर मलिक को बनाया अपना जीवनसाथी। जानिए असर मलिक कौन हैं और क्या करते हैं ?

शांति के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाली मलाल यूसुफजई अब अपने जीवन के अगले चरण में प्रवेश कर रही हैं।

उन्होंने एक पारिवारिक समारोह में असर मलिक के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ने का फैसला किया।

उनकी शादी का यह समारोह बर्मिंघम में आयोजित किया गया था। मलाला के लिए यह अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक है।

मलाला ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी और लोगों से उन्हें शुभकामनाएं देने की गुजारिश की।

मलाला युसूफ के पति असर मलिक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।

उन्होंने पिछले साल मई में ही इस पद पर ज्वाइनिंग की थी। इससे पहले असर मलिक पाकिस्तान सुपर लीग के लिए भी काम कर चुके हैं।

वह एक प्लेयर मैनेजमेंट कंपनी का सफलतापूर्वक संचालन ही कर चुके हैं।

साल 2012 में मलिक ने लाहौर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। असर मलिक एल एम एस पाकिस्तान के को फाइंडर भी हैं।

इतना ही नहीं मुल्तान सुल्तान टीम के खिलाड़ियों के लिए असर मलिक डेवलपमेंट प्रोग्राम भी चलाते हैं।

असर मलिक का जन्म लाहौर में हुआ है। इन्होंने अपनी सारी पढ़ाई लाहौर से ही पूरी की है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मलाला और असर की पहली मुलाकात साल 2019 में एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी।

मलाला ने पूरी दुनिया में उस समय प्रसिद्धि हासिल की थी जब साल 2012 में तालिबान आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी थी जब वे स्कूल से वापस लौट रही थीं।

मलाला की उम्र उस समय करीब 15 वर्ष के आसपास थी।

उनके इलाज के लिए मलाला को लंदन ले जाया गया। वहां पर डॉक्टरों के अथक प्रयासों से उन्हें नया जीवन मिला था।

मलाला उस वक्त पाकिस्तान की स्वात घाटी में लड़कियों की शिक्षा के लिए सामाजिक कार्य कर रही थीं।

उनकी यह मुहिम तालिबानियों को अच्छी नहीं लगी और उन्हें जान से मारने का फैसला किया।

इलाज के बाद मलाला और उनके परिवार को ब्रिटेन ने अपने यहां शरण दी और नागरिकता की भी दी। यहां आकर मलाला ने अपनी पढ़ाई पूरी की।

पाकिस्तान में शिक्षा के प्रति महिलाओं में जागरूकता फैलाने के लिए मलाला यूसुफजई को यूरोपीय यूनियन ने साल 2013 में प्रतिष्ठित शैखरोव मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित किया था।

साल 2014 में भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सम्मानित किया था। मलाला सबसे कम उम्र में यह पुरस्कार पाने वाली विजेता हैं।

मलाला अपनी छोटी सी उम्र में ही पाकिस्तान में तालिबान और स्वात घाटी के के हालातों पर बीबीसी के गुलमकई नाम से ब्लाग लिखती थीं।

ऐसा करके वे स्वात की लड़कियों की स्थिति को बता रही थीं। मात्र 16 साल की उम्र में मलाला यूसुफजई ने यूएन में लड़कियों की शिक्षा पर भाषण दिया था।

मलाला के सामाजिक कार्यों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र में 12 जुलाई को मलाला डे घोषित किया था। 12 जुलाई को मलाला यूसुफजई का जन्मदिन है।

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