यदि आप भी कर रहे हैं ये 6 गलतियां तो आप अपने बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ रहे हैं।

बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कार देना बहुत कठिन काम है। कई बार बच्चों के माता-पिता को यह समझ पाना बेहद कठिन हो जाता है कि आखिर वे कौन सा तरीका अपनाएं जिनसे उनके बच्चे एक अच्छे इंसान बन सकें।

अपनी अच्छी पैरंनटिंग देने के चक्कर में कई बार हम अपने बच्चों के साथ गलत व्यवहार कर जाते हैं। जिसका उनके मानसिक स्थिति पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है।

आज के जमाने में बच्चों के साथ एक मजबूत रिश्ता स्थापित करना बेहद आवश्यक है। इसीलिए मां-बाप को चाहिए कि अपने बच्चों के साथ गंदा व्यवहार ना करें।

खराब व्यवहार करने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।

तो यह जानते हैं वे कौन सी गलतियां है जिन्हें मां बाप अनजाने में अपने बच्चों के साथ कर जाते हैं।

दूसरों के सामने ज्यादा अनुशासित रखना

बच्चे जब दूसरों के सामने गलती करते हैं तो मां बाप को अपने गुस्से पर काबू पाना चाहिए। बच्चों को सबके सामने डांटना नहीं चाहिए।

जब आप बच्चों को सबके सामने डांटते हैं तो बच्चों का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास दोनों ही कमजोर होते हैं।

मां-बाप को चाहिए कि वे अपने बच्चों को जब भी अकेले में हो तब उन्हें उनकी गलती समझाएं और उनसे प्यार से पेश आएं।

ऐसा करने से बच्चे अपनी बात पर मंथन करेंगे और आगे ऐसी गलतियां करने से बचेंगे।

दूसरों से तुलना मत करो

बहुत से मां-बाप की आदत होती है कि वे अपने बच्चों की तुलना और बच्चों से करते हैं। ऐसा करने से बच्चे अपने आप को हीन मानने लगते हैं और खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

जब बच्चों की तुलना और बच्चों से की जाने लगती है तब बच्चों को आत्मसम्मान और आत्मविश्वास दोनों ही कमजोर हो जाते है। बच्चों की तुलना कभी योग्यताओं के आधार पर नहीं करनी चाहिए।

हो सकता है कि आपके बच्चे का दोस्त गणित के सवाल हल कर देता हूं लेकिन आपका बच्चा हो सकता है कि अच्छी कविताएं लिख लेता हो।

तो ऐसे में जरूरी है कि हर मां-बाप को अपने बच्चे की क्षमता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

गलतियों पर बहुत ज्यादा ध्यान देना

कई बार बच्चों के माता-पिता बच्चों के हर गलत व्यवहार को नोटिस करते हैं। मां बाप बच्चों को बात-बात पर रोकना-टोकना शुरू कर देते हैं।

मां बाप यह बात अक्सर भूल जाते हैं कि हम अपने बच्चे के जिस व्यवहार से परेशान हैं। हो सकता है कि भविष्य में वही व्यवहार उसे फायदेमंद हो।

अगर आपका बच्चा पढ़ने-लिखने से ज्यादा खेलने-कूदने में ज्यादा समय बिता रहा है तो आपका बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होगा। हो सकता है कि भविष्य में वह खेल में आपका नाम रोशन करें।

कल्पना से भरपूर उम्मीद रखना

जब मां बाप अपने बच्चों को पालते हैं तो उनसे उम्मीदें भी रखते हैं। परंतु जब मां-बाप वास्तविकता से दूर भी उम्मीदें रखकर अपने बच्चों से पालते हैं, जिनको पूरा कर पाना बच्चे के बस की बात नहीं। तब मां-बाप निराश हो जाते हैं।

हर मां बाप अपने बच्चों को परफेक्ट बनाना चाहता है। लेकिन ऐसा कर पाना असंभव है। बच्चे को मां बाप अपने बनाए सांचे में ढालना चाहते हैं।

जब बच्चा उनके बनाए पैमाने पर खरा नहीं उतरता है। तब मां-बाप को गुस्सा, क्रोध डिप्रेशन जैसी समस्या आने लगती हैं।

मां-बाप को चाहिए कि अपने बच्चों को अपनी क्षमता के अनुसार ही कार्य करने दें। उसे वह काम करने दें जिसमें हुनरमंद हो।

नियम स्थापित करने में असफल होना

हर मां बाप को चाहिए कि वह अपने बच्चों को एक गाइडलाइन बनाएं। उसमें बच्चों को के साथ-साथ खुद भी उस गाइडलाइन को फॉलो करें।

कई बार ऐसा होता है कि जब गाइड लाइन बनाई जाती हैं तो मां-बाप तो बच्चों से चाहते हैं कि बच्चे तो गाइडलाइन को फॉलो करें लेकिन मां-बाप को फॉलो नहीं करते। ऐसी स्थिति में बच्चे भी आपकी बात नहीं मानेंगे।

परिवार को समय न दे पाना

कई बार अपने व्यापारिक या फिर नौकरी के कार्यों में माता-पिता इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे अपने बच्चों के लिए समय नहीं दे पाते।

शाम को सब बच्चे यह चाहते हैं कि उनके माता-पिता उनसे बात करें उनके साथ हंसी-मजाक करें और खेलें।

लेकिन जब बच्चे को उनके माता-पिता नजरअंदाज करते हैं तब वह बुरा महसूस करते हैं।

बच्चों को हद से ज्यादा नजरअंदाज किया जाता है तब बच्चों को अंदर डिप्रेशन ऐसी समस्या आ सकती हैं।

हर मां बाप को यह परम कर्तव्य है की वह अपने बच्चे के साथ क्वालिटी क्वालिटी टाइम व्यतीत करें। उनके साथ खेलें। उनकी बातें सुनें। हो सके तो उनके साथ बैठकर कोई किताब पढ़ें।

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