इंडोनेशियाई पूर्व राष्टपति की बेटी ने अपनाया हिन्दु धर्म। पेश की जड़ों की ओर लौटने की मिशाल।

प्रत्येक मनुष्य राष्ट्र और समाज का अहम अंग होता है। मनुष्य इस सब का मूल होता है जो व्यक्ति और राष्ट्र अपने मुंह से फेरता है तो वह अपने जीवन का आनंद नहीं उठा पाता।

भारत का मूल यदि कहीं है तो वह हिंदुत्व में है। इंडोनेशिया की प्राचीन संस्कृति का मूल हिंदू संस्कृति है।

यहां की आबादी कुल 26 करोड़ है और इस पूरी आबादी का करीब 87% मुसलमान है।और केवल 1.5% हिंदू हैं।

इंडोनेशिया की पूर्व राष्ट्रपति सुकुर्णो की बेटी सुकमावती ने हिंदू धर्म अपना लिया है।

जब उन्होंने हिंदू धर्म अपनाया था तब उस को अपनाने के कार्यक्रम में एक उत्सव आयोजित कराया गया था। सुकमावति ने अपनी दादी ईदा से प्रेरणा पाकर हिंदू धर्म धारण किया है।

अपनी दादी की प्रेरणा से ही सुकमावती ने रामायण और महाभारत का गहन अध्ययन किया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है।

इस कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार करने के लिए हिंदू धर्म के सभी रीति-रिवाजों का पालन किया।

हिंदू पुजारियों ने उन्हें मंत्रोच्चारण करके शुद्ध किया। सुकमावति के ऊपर नदियों के पवित्र जल का छिड़काव किया गया।

उनका आरती उतारकर धर्म में स्वागत किया गया। सुकुमावती का यह फैसला संपूर्ण एशिया में आग की तरह फैल गया है।

यहां पर मलेशिया सहित तमाम मुस्लिम बहुल वाले कट्टरपंथियों की नजर में यह बात चिंता करने वाली है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें इंडोनेशिया का मूल हिंदू परंपरा में है। मलेशिया का राष्ट्रीय चिन्ह में विष्णु हैं। इंडोनेशिया की वायु सेना का नाम गरुड़ एयरवेज है।

भारत में जिस पद पर एसडीएम कार्य करता है उस उस पद के लिए इंडोनेशिया में महिपति के नाम से जाना जाता है। प्रथम राष्ट्रपति का नाम हिंदू परंपरा में सुक्रुर्णों के नाम से जाना जाता है।

सुकमावती भी एक हिंदू नाम ही है। चौथी शताब्दी के दौरान एशिया की सभ्यता उन्नति पूर्ण थी।

यहां के रहने वाले हिंदू और बौद्ध धर्म को मानते थे। यहां पर हिंदू राजा राज्य करते थे। समय के साथ-साथ यहां पर मुस्लिम व्यापारी आओ यहां व्यापार करने लगे।

धीरे धीरे व्यापारी ही यहां पर इस्लाम धर्म फैलाने लगे। उसके बाद यहां पर इस्लाम फैलने लगा और मुसलमानों ने अपना शासन स्थापित कर दिया।

भले ही आज इंडोनेशिया मुस्लिम बाहुल्य देश है परंतु यहां पर हिंदू संस्कृति की गहरी छाप है।

यहां के निवासियों के नाम हिंदू और अरबी संस्कृति के आधार पर रखे जाते हैं। यहां पर कुरान को संस्कृत में पढ़ाया जाता है।

न केवल इंडोनेशिया के लिए बल्कि दुनिया के अन्य इस्लामिक राष्ट्रों के लिए भी यह घटना बेहद प्रेरणादायक हो सकती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें ईरान में इस्लाम के आगमन से पहले पारसी धर्म का शासन था। यहां के देवता अथर्ववेद के उर्वान थे।

इसके बाद इस्लाम में यहां का कब्जा कर लिया और पारसी वहां से भाग का भारत में आकर बस गए।

आज भारत और पाकिस्तान भले ही अलग-अलग हो गए हैं लेकिन साल 1947 से पहले पाकिस्तान भारत का ही एक हिस्सा था

और वैदिक संस्कृति का अनुयाई था परंतु मजहब के आधार पर हुए इस विभाजन का आधार आज भी सिंदु नदी है।

पाकिस्तान की मूल संस्कृति अरब संस्कृति से बिल्कुल अलग है। परंतु पाकिस्तान ने फिर भी इस्लाम राष्ट्र बनाया।

पाकिस्तान अपने मूल संस्कृति से अलग हो गया और उसी का कारण रहा कि पाकिस्तान आज बारूद के ढेर पर बैठा है।

जो लोग अपना मुंह छोड़कर नया चोला धारण करते हैं वे कभी कभी सफल नहीं हो पाते। सत्य को आप दबा सकते हो लेकिन मिटा नहीं सकते।

न केवल पाकिस्तान को बल्कि दुनिया के सभी इस्लामिक राष्ट्रों को यह सत्य स्वीकार करना चाहिए कि संस्कृति से जुड़ा व्यक्ति अपनी सत्य और निष्ठा के कारण कभी हार नहीं सकता।

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