किस्सा एक गांव का जहां एक-दूसरे पर गोबर फैंककर दीवाली मनाई जाती है।

दीपावली दीपों का त्योहार है। इस दिन सभी लोग अपने घर की साफ सफाई करते हैं और परिवार के साथ खुशियां बांटते हैं।

दीवाली के दिन हम अपने घर के हर एक कोने में दीया रखते हैं। साथ ही यह प्रयास करते हैं कि घर का कोई भी अंधेरे में ना रहे।

इसके बाद हम लोग पटाखे जलाते हैं। यह त्यौहार भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है।

यह सब तो हम सामान्य बातें कर रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि दीपावली का समापन कोई एक दूसरे के ऊपर गाय का गोबर फैंक कर दीवाली को विदाई दे।

जी हां ! कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बसा एक छोटा सा काम गोमतापुरा में यह प्रथा बहुत पुरानी है जो आज तक चली आ रही है। इस प्रथा को गोरेहब्बा के नाम से जाना जाता है।

इस प्रथा के अनुसार लोग करीब दोपहर में अपने घर से निकलते हैं और अपने साथ गाय का गोबर लेकर आते हैं। और फिर इसके थक्के को एक दूसरे के ऊपर फेंकते हैं।

गोबर पहले मंदिर जाता है

गाय के गोबर को सबसे पहले एक ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर स्थानीय मंदिर में लेकर जाया जाता है।

इस मंदिर का पुजारी इस गोबर की पूजा और आराधना करके अनुष्ठान की सभी रस्में पूर्ण करता है।

इसके बाद मंदिर में थोड़ा सा गोबर चढ़ा दिया जाता है। इसके बाद इस गोबर को पुरुष और लड़के एक दूसरे के ऊपर सकते हैं।

दूर-2 से आते हैं लोग

गोरेहब्बा नाम की एक प्रथा दक्षिण में इतने लोकप्रिय है कि लोग दूर-दराज के शहरों से गोमतापुरा आते हैं।

लोग गोबर युद्ध में शामिल होने के लिए और यहां मस्ती करने के लिए आते हैं। लोगों की आस्था है कि इससे स्वास्थ्य अच्छा होता है।

स्थानीय लोग कहते हैं कि गाय के गोबर में चमत्कारिक गुण होते हैं। इसको अपने शरीर पर लगाने से बीमारियां नष्ट हो जाते हैं।

भारतीय परंपरा अनुसार गाय के से प्राप्त होने वाला हर एक पदार्थ शुद्ध एवं पवित्र है।

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