निशा ग्रेवाल:- दादाजी के मार्गदर्शन में आईएएस बनी उनकी पोती।

वक्त के साथ-साथ समाज में बदलाव आ रहा है। एक जमाना था जब बेटे ही घर की जिम्मेदारियां उठाया करते थे।

बेटों से ही घर का नाम रोशन करने की उम्मीद हुआ करती थी। लेकिन अब बेटियां भी बेटों के कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं।

हमारे समाज के ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां पर बेटियों को बेहद संघर्ष करना पड़ रहा है।

हरियाणा में तो यह हालात है कि एक हजार पुरुषों पर 800 के आसपास लड़कियां रह गई हैं।

यहां पर लड़कियों की हालात बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। यहां लड़कियों को ज्यादा पढ़ाई-लिखाई नहीं कराई जाती है।

ऐसे में हरियाणा की लड़की जिसका नाम निशा ग्रेवाल है, ने यूपीएससी की परीक्षा पास करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। निशा ग्रेवाल के परिवार वालों ने निशा का हर तरह से साथ दिया था।

परिवार वालों का प्यार और समर्थन पाकर निशा भी गदगद हो गईं और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने लगीं।

पहले ही तय कर लिया था लक्ष्य

निशा ग्रेवाल के पिताजी बिजली विभाग में काम करते हैं। निशा अपनी पढ़ाई की शुरुआत में ही बेहद अच्छी थीं।

निशा की प्रतिभा देखकर निशा के परिवार वालों ने निशा को आगे बढ़ाने की ढानी।

निशा खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें ऐसा परिवार मिला, जिसने उसका हर कदम पर साथ दिया।

परिवार वालों का तो धन्यवाद निशा देती ही हैं लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा निशा की सफलता का श्रेय जाता है तो वह हैं निशा के दादा जी रामफल।

निशा ने पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन पूरा किया और उसके बाद पढ़ाई करना शुरू कर दिया।

निशा ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत में ही यूपीएससी का लक्ष्य निर्धारित कर लिया और उस पर काम करना शुरू कर दिया।

दादाजी ने दिया भरपूर समर्थन

वैसे तो निशा का पूरे परिवार ने समर्थन किया था लेकिन इन सब में उनके दादाजी रामफल ने उनका सबसे ज्यादा समर्थन किया था। निशा अपनी सफलता का क्रेडिट भी अपने दादा जी को ही देती हैं।

निशा के दादाजी पेशे से शिक्षक रह चुके हैं। रामफल अपनी पोती के लिए हर संभव सहायता देने का प्रयास करते थे।

रामपाल जब भी निशा को पढ़ाते थे तो वे दादाजी बन कर नहीं ठीक वैसे ही व्यवहार करते थे जैसा एक शिक्षक अपने शिक्षार्थी से करता है। निशा के दादाजी ने निशा को पढ़ाई में बचपन से ही मजबूत कर दिया था।

निशा के दादाजी गणित के शिक्षक रह चुके हैं। निशा के दादाजी निशा को गणित के साथ-साथ अन्य विषयों का भी ज्ञान कराते थे।

9 घंटे की पढ़ाई करती थीं निशा

मीडिया को दिए इंटरव्यू में निशा ने बताया कि वे रोजाना करीब 8 से 9 घंटे तक पढ़ाई करती थीं।

निशा बताती हैं कि उन्होंने एनसीईआरटी की किताबें अपना बेस मजबूत किया था। इसके बाद उन्होंने अन्य प्रमाणित किताबें पढ़ी थीं।

पहले प्रयास में भेदा लक्ष्य

निशा ने यूपीएससी की पढ़ाई के लिए एक सटीक रणनीति बनाई और उस रणनीति पर लगातार काम करती रहीं।

निशा ने अपनी रणनीति का एक भी स्टेप छोड़ा नहीं था। वे लगातार अपना संघर्ष करती रहीं।

उन्होंने सही रणनीति, कड़ी मेहनत, ज्यादा से ज्यादा रिवीजन और उत्तर लेखन का अभ्यास किया। उनके इसी जुनून ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।

2020 के यूपीएससी एग्जाम को पहले ही प्रयास में 51 विजय प्राप्त करके आईएएस बनीं।

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