T20 वर्ल्ड कप से भारतीय टीम की निराशाजनक विदाई। जिम्मेदार कौन ? खिलाड़ी या बोर्ड की नीतियाँ ?

भारतीय क्रिकेट टीम 2021 वर्ल्ड कप से विदाई हो गई है। भारतीय क्रिकेट टीम के निराशाजनक प्रदर्शन से कोहली की कप्तानी भी सवालों के घेरे में है। जबकि कुछ लोग बीसीसीआई की नीतियों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

इस तरह के सवाल उठना स्वाभाविक है क्योंकि भारतीय क्रिकेट टीम पिछले 1 साल से बायो बबल में रह रही है। भारतीय क्रिकेट टीम को 1 साल से आराम करने का जरा भी समय नहीं मिला है ।

लगातार बायो बबल में रहने के कारण भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति भी प्रभावित हुई है।

इसका असर पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ हुए मैच में साफ तौर पर देखा जा सकता था।

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी दबाव में बल्लेबाजी नहीं कर पाए और गलत शॉट लगाकर पवेलियन लौट गए। गेंदबाजों की अगर बात करें तो वे भी पावर प्ले में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा पिछले 7 महीनों से कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेले थे। इसके बावजूद टीम में स्थान दिया गया।

भारत के अलावा दुनिया की सभी टीमों ने लेग स्पिनर को खिलाया था और लेग स्पिनर स्पिनरों की मदद से ही उन टीमों ने जीत हासिल की है।

भारतीय क्रिकेट टीम ने यजुवेंद्र चहल जोकी बेहतरीन फॉर्म में चल रहे थे, उनको टीम में शामिल नहीं किया और राहुल चाहर को अपने साथ ले गए तो उन्हें स्टैंड बाॅय बनाकर ही रखा।

शुरु से थके हुए नजर आ रहे थे खिलाड़ी

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज भरत अरुण ने भी रविवार को अपना दर्द बयां किया था।

उन्होंने कहा था कि आईपीएल और विश्वकप के बीच थोड़ा समय खाली होना चाहिए ताकि खिलाड़ी आराम कर सकें। उनकी बात बिल्कुल सही भी थी।

बहुत ज्यादा व्यस्त शेड्यूल होने के कारण भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी बहुत ज्यादा थके हुए नजर आ रहे थे। ऐसा उनके बॉडी लैंग्वेज से स्पष्ट देख रहा था।

भारतीय टीम के बारे में सबसे मजेदार बात तो यह है उन्होंने पिछले साल से लेकर आज तक सिर्फ 3 सीरीज खेली हैं। जिनमें ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड और श्रीलंका शामिल है।

यदि अफगानिस्तान और स्कॉटलैंड के खिलाफ हुए मैचों को एक साइड अगर रख दिया जाए तो भारतीय क्रिकेट टीम पिछले दो मुकाबलों में असहाय नजर देखी जा रही थी।

अभी आईपीएल के कारण है खिलाड़ियों में उत्साह की कमी थी, इसके अलावा बायो बबल में रहना भी भारतीय खिलाड़ियों पर भारी पड़ रहा था।

इस बात का जिक्र भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया था।

लेग स्पिनर को क्यों नहीं खिलाया

आईपीएल के शुरुआत में भले ही यूज़वेंद्र चहल फॉर्म में नहीं दिख रहे थे लेकिन उस के दौरान उन्होंने अपने फॉर्म का परिचय सबको दे दिया था।

इसके बावजूद उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल नहीं किया गया जबकि पूरी दुनिया की टीम में एक लेग स्पिनर को जरूर शामिल कर रहे थे।

भारत रविंद्र जडेजा और वरुण चक्रवर्ती विश्व कप में का भक कोई जलवा नहीं देख नहीं देखने को मिला।

बल्कि उनकी खराब गेंदबाजी के चलते भारतीय क्रिकेट टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

यदि हम श्रीलंका के वानिंदू हसारंगा और बांग्लादेश के शाकिब अल हसन को हटा दें तो इस टूर्नामेंट में अब तक सबसे ज्यादा विकेट लेग स्पिनर के खाते में ही गए हैं।

श्रीलंका ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर एडम जंपा ने 11 विकेट ले लिए हैं इंग्लैंड के आदिल रशीद ने 8 विकेट जबकि अफगानिस्तान के राशिद खान ने भी आठ विकेट ले लिए हैं।

आईपीएल में वक्त किया बर्बाद

अब हम बात करते हैं पिछले साल अक्टूबर से। पिछले साल अक्टूबर में आईपीएल खेलने के लिए भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में वहां भी उन्हें कई दिनों तक बायो बबल ल में ही रहना पड़ा था।

ऑस्ट्रेलिया से वापस लौटने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के लाई थी।

इसमें भी भारतीय क्रिकेट टीम को बायो बबल के कड़े नियमों में रहना पड़ा था, मार्च में यह सीरीज खत्म हो गई और उसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी आईपीएल खेलने गए थे।

इस दौरान कई भारतीय खिलाड़ी को कोरोना संक्रमित भी हुए थे। यही कारण था कि बीसीसीआई को आईपीएल बीच में ही रद्द करना पड़ा था।

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी अभी भी सदमे से ठीक से उबर भी नहीं पाए थे कि उन्हें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा।

आईपीएल खेलने के लिए इंग्लैंड से पांच दिनों के अंदर यूएई गए

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी करीब साढ़े 3 महीने तक इंग्लैंड में रहे थे। वहां पर भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी को टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल खेलना था। इसीलिए वे वहीं पर रुके रहे।

इसके बाद उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भारत के खिलाड़ी संक्रमित होने के कारण होने के कारण इंग्लैंड और भारत का पांचवा टेस्ट मैच रद्द कर दिया गया।

यह टेस्ट मैच रद्द हो गया था लेकिन भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों को आराम नहीं मिला।

वहां पर केवल 5 दिन रुकी और इसी दौरान इन्हें आईपीएल खेलने के लिए दुबई दुबई आने के बाद भारतीय खिलाड़ियों को फिर से बायो बबल में ही रहना पड़ा था।

इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान ने अपने खिलाडियों को आराम करने को कहा

भारत के खिलाड़ी तो पूरे समय व्यस्त रहे थके हारे रहे लेकिन अगर हम अन्य बोर्ड की तरफ देखें तो हम देखते हैं कि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान ने अपने खिलाड़ियों को क्रिकेट के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सीरीज पर भी काम किया करने को कहा था।

उन्होंने खिलाड़ियों को रोटेट किया और उसी रोटेशन का फायदा उठा रहे हैं।

कई ऐसे खिलाड़ी थे जो आईपीएल में खेल रहे थे लेकिन उन्हें उनकी बोर्ड ने आईपीएल का दूसरा फेज नहीं खेलने दिया था।

उनसे विश्व कप से पहले आराम करने को कहा गया था। जिसमें जोश बटलर और बेयरस्टो जैसे खिलाड़ी शामिल है।

रोटेशन प्रणाली का फायदा इंग्लैंड ने उठाया

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों का रोटेशन बनाया था जिसकी इंग्लैंड के कई पूर्व खिलाड़ियों ने जमकर आलोचना की थी।

दिग्गज खिलाड़ियों ने टीम के अहम खिलाड़ियों को आराम देने पर प्रश्न चिन्ह लगाया था। लेकिन अपने खिलाड़ियों पर रोटेशन पुराने लागू करने का फायदा इंग्लैंड को मिल रहा है।

इंग्लैंड सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाली टूर्नामेंट की पहली टीम है। सभी खिलाड़ी अपनी अपनी जगह पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।

आईपीएल की जगह वर्ल्ड कप की तैयारी करा सकते था बीसीसीआई

सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड की तरह भारतीय क्रिकेट बोर्ड भी यह जानता था कि इसी साल T20 विश्व कप का आयोजन किया जाना है।

इसी चीज को अपने दिमाग में रखते हुए सभी क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों से लीग क्रिकेट से ध्यान हटाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर फोकस करने को कहा था।

लेकिन बीसीसीआई के सर पर तो आईपीएल का भूत चढ़ा हुआ था। वह इस जुगत में था कि किसी भी तरह आईपीएल के बचे हुए मैच पूरे करा दिए जाएं।

यदि बीसीसीआई चाहता तो खिलाड़ियों को आईपीएल से छुट्टी करा कर वर्ल्ड कप के लिए तैयारी भी करा सकता था।

इसका सबसे अच्छा फायदा यह होता है कि अन्य खिलाड़ियों को आराम के साथ साथ तैयारी का भी मौका मिल जाता है लेकिन बीसीसीआई तो अपने फायदे की देख रहा था।

आईपीएल तैयारी का तरीका तो अच्छे खिलाड़ी टीम से नदारद क्यों ?

आईपीएल को लेकर बीसीसीआई कहता है कि खिलाड़ियों की तैयारी का सही माध्यम है।

इस पर सवाल यह उठता है कि यदि आईपीएल तैयारियों का माध्यम है तो इस फॉर्मेट के बेहतरीन खिलाड़ियों का भारतीय क्रिकेट टीम में जगह क्यों नहीं दी गई ?

शिखर धवन, हर्षद पटेल, आवेश खान, ऋतुराज गायकवाड, संजू सैमसन अर्शदीप सिंह, शुभमन गिल पृथ्वी शाह, यजुवेंद्र चहल जैसे खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा क्यों नहीं बनाएगा ?

हम तो बस इतना कहना चाहेंगे कि भारतीय क्रिकेट टीम अगर निराशाजनक विदाई लेकर लौटी तो

उसके जिम्मेदार खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम मैनेजमेंट और बीसीसीआई भी जिम्मेदार है।

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