रेमंड समूह के पूर्व चेयरमैन बोले- अपने जीते जी अपनी सम्पत्ति अपने बच्चों को मत देना वरना बाद में मेरी तरह पछताओगे।

जाने-माने उद्योगपति विजयपत सिंघानिया ने कैमरे के सामने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि उन्होंने अपने जीवन में कई बड़े सबक सीखे।

उनमें से एक यह है कि किसी भी व्यक्ति को अपने जीते जी अपनी संपत्ति अपने बच्चों को नहीं देनी चाहिए।

विजयपत सिंघानिया रेमंड समूह के पूर्व चेयरमैन हैं। उन्होंने अपने आत्मकथा लिखी है ,

जिसका नाम है एन इनकंप्लीट लाइफ। उन्होंने इसमें अपने बचपन से लेकर रेमंड समूह में बिताए गए दशकों का अनुभव साझा किया है।

उन्होंने अपनी किताब में अपने दोस्तों की, अपने दुश्मनों की और व्यापार में क्या क्या कलाकारी होती है सबका वर्णन किया है।

आपको बता दें कि साल 2015 में परिवार में उत्पन्न हुए संपत्ति के विवाद के कारण विजयपत सिंघानिया को अपना घर और अपना काम छोड़ना पड़ा था।

विजयपत सिंघानिया ने अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल किया वह सब एक झटके में खो गया।

जो आज भी अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस करना के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि आपको अपने बच्चों को अपनी संपत्ति देनी चाहिए लेकिन अपने जीवित रहते अपनी संपत्ति किसी को नहीं देनी चाहिए।

विजयपत सिंघानिया कहते हैं कि मैं सबको यह सलाह देना चाहूंगा कि आप वह गलती मत करना, जिसे करके मैं आज तक पछता रहा हूं।

मैं हर दिन अपनी इस गलती का प्रायश्चित कर रहा हूं कि क्यों मैंने अपने जीवित रहते हैं अपनी संपत्ति अपने बच्चों में बांट दी।

विजयपत सिंघानिया बताते हैं कि अब मेरे पास कुछ नहीं है। सब कुछ मेरे बच्चों के ऊपर ही निर्भर है।

अपना दर्द बयां करते हुए वह कहते हैं कि मुझे मेरे कार्यालय में जाने से रोक दिया गया है, जहां मेरे महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। वहां भी मुझे जाने की इजाजत नहीं है। जबकि वह सब कुछ मेरा है।

अपनी किताब में सिंघानिया ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा है कि मुझे मजबूरन मुंबई और लंदन में अपनी कार को छोड़ना पड़ा था।

मैं आज इतना बेबस और लाचार हूं कि मैं अपने सचिव से संपर्क भी नहीं कर सकता।

मुझे कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि रेमंड के कर्मचारियों को उनके बॉस ने ऐसे सख्त निर्देश दे रखे हैं कि मुझसे बात ना करें और ना ही कभी मेरे कार्यालय की तरफ से न जाएं।

विजयपत सिंघानिया के परिवार की अगर बात करें तो उनका जन्म बेहद बड़े परिवार में हुआ था।

उन्होंने अपने परिवार का पूरा कारोबार संभाला लेकिन उन्होंने इसके साथ-साथ अपनी रूचि के कार्य किए।

उन्होंने पायलट के तौर पर दो बार कीर्तिमान बनाए। उन्होंने कुछ समय के लिए प्रोफ़ेसरशिप भी की थी। एक बार मुंबई के शेरिफ भी बने थे।

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