क्या वास्तव में मुगल बादशाह औरंगजेब को हिन्दुओं से घृणा थी ? पढिए यह विश्लेषण।

मुगलों ने भारत पर 500 साल से ज्यादा समय तक शासन किया था। लेकिन उन सभी में मुगल बादशाह औरंगजेब ही एकमात्र मुगल बादशाह थे जिन्होंने भारतीय जनमानस में अपनी जगह नहीं बनाई।

आम जनमानस में औरंगजेब को हिंदू विरोधी और हिंदुओं का दमन करने वाला सम्राट माना जाता था। आम जनमानस औरंगजेब को बेहद क्रूर शासक मानता है।

उसके पीछे की वजह यह मानता है कि औरंगजेब वह मुगल बादशाह था जिसने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अपने भाई दारा शिकोह की भी जान ले ली।

यहां तक तो ठीक था और उनके बारे में एक बात और कहीं जाती है कि औरंगजेब इतना क्रूर था कि उसने अपने पिता को साढ़े साल तक आगरा के किला में बंदी बनाकर रखा था।

शाहिद नदीम पाकिस्तान के नाटककार हैं, उन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन के लिए औरंगजेब को ही जिम्मेदार ठहराया है।

उनका कहना है कि जब औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को युद्ध में हराया था तभी से भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे के बीज बो गए थे।

इतना ही नहीं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी अपनी आत्मकथा डिस्कवरी ऑफ इंडिया में औरंगजेब को धर्मांध और पुरातन पंथी मुगल बादशाह बताया है।

ऑडरी ट्रस्चके एक अमेरिकी इतिहासकार हैं। उन्होंने औरंगजेब पर एक किताब लिखी है, जिसका नाम है औरंगजेब द मैन एंड द मिथ।

इनका मानना है कि औरंगजेब को जैसा बताया जाता है औरंगजेब वास्तव में वैसा नहीं था।

औरंगजेब ने हिंदू मंदिरों को केवल इसीलिए नहीं गिराया था कि वह हिंदुओं से घृणा करता था।

अपनी किताब में लिखती हैं कि औरंगजेब के प्रति आम जनमानस में घृणा के पीछे अंग्रेजों के समय के इतिहासकार काफी हद तक जिम्मेदार थे।

उन्होंने भारत में फूट डालो और राज करो की नीति के मद्देनजर हिंदू-मुसलमानों के बीच वैमनस्यता बढ़ाने के उद्देश्य से औरंगजेब को धर्मांध बता डाला।

ऑडरी अपनी किताब में यह भी लिखती हैं यदि औरंगजेब ने भारत पर 20 साल और कम शासन किया होता तब उसका सही आकलन किया गया होता।

49 साल तक भारत पर शासन

औरंगजेब ने करीब 49 सालों तक भारत पर राज किया था। उस समय भारत की आबादी करीब 15 करोड़ के आसपास रही होगी।

इतिहासकार बताते हैं कि औरंगजेब के शासनकाल में भारत का साम्राज्य पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैल गया था।

ऑडरी अपनी किताब में लिखती हैं कि जब मुगल बादशाह औरंगजेब की मृत्यु हुई थी। तब उन्हें एक कच्ची कब्र में महाराष्ट्र के खुलदाबाद में दफना दिया गया था।

जबकि हुमायूँ को उनका मकबरा बनवाया गया था। इतना ही नहीं और उनके पिता को ताजमहल में दफनाया गया था।

ऑडरी अपनी किताब में लिखती हैं हजारों मंदिरों को नुकसान पहुंचाया था यह केवल गलतफहमी है। औरंगजेब ने कुछ ही मंदिरों को नुकसान पहुंचाने की बात कही थी।

ऐसा कहना भी बिल्कुल गलत है कि औरंगजेब अपने शासन में गैर धर्म के लोगों का नरसंहार कराया था।

अगर हम औरंगजेब के जमाने के मंत्रियों की गणना करें तो औरंगजेब ने अपने दरबार में हिंदुओं को कई महत्वपूर्ण पदों से बैठाया था।

साहित्य से प्रेम था औरंगजेब को

औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर 1618 को हुआ था। औरंगजेब के जन्म के समय भारत पर औरंगजेब के दादा जहांगीर का शासनकाल था। शाहजहां के तीसरे बेटे औरंगजेब की मां का नाम मुमताज महल था।

औरंगजेब को साहित्य से बेहद लगाव था। औरंगजेब ने इस्लामिक साहित्य पढ़ा था।

उसने तुर्की साहित्य में भी विशेष रुचि दिखाई थी। मुगल बादशाह औरंगजेब फर्राटेदार हिंदी बोलने में माहिर थे।

बेहद कम उम्र में ही शाहजहां के चारों बेटों में सत्ता का युद्ध छिड़ गया था। उस जमाने में पिता की सत्ता पर सभी भाइयों का बराबर हक हुआ करता था।

शाहजहां की इच्छा थी कि वे अपने बड़े बेटे दारा शिकोह को अपने उत्तराधिकार सोंपे। परंतु औरंगजेब खुद को मुगल सल्तनत के लिए सबसे योग्य मानता था।

ऑडरी ने अपनी किताब में इस घटना का जिक्र किया है कि जब दारा शिकोह की शादी के दौरान शाहजहां ने दो हाथी में सुधाकर और सूरत में युद्ध कर कराया था। यह खेल उस जमाने का बेहद लोकप्रिय खेल हुआ करता था।

सुधाकर घोड़े पर सवार औरंगजेब पर गुस्से से तेजी से झपटा। तभी औरंगजेब ने सुधाकर के माथे पर से हमला कर दिया।

सुधाकर ने घोड़े को इतनी तेजी से धक्का मारा और फिर औरंगजेब जमीन पर गिर गया। वहां पर देखने वालों में औरंगजेब का भाई शुजा भी था और राजा जयसिंह भी थे।

इन्होंने तो औरंगजेब को बचाने की भरपूर कोशिश की परंतु को बचाने के लिए भाई दारा शिकोह ने जरा भी प्रयास नहीं किया था। औरंगजेब के दरबार इतिहासकारों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है।

इतिहासकारों ने हाथी वाली घटना की तुलना औरंगजेब के पिता शाहजहां से की थी। जब उन्होंने जहांगीर को बचाने के लिए एक शेर पर काबू पाया था।

औरंगजेब का प्रेम

एक अन्य इतिहासकार हैं कैथरीन ब्राउन। उन्होंने एक लेख लिखा है जिसका नाम है डिड औरंगजेब बैन म्यूजिक।

कैथरीन ने इसमें लिखा है कि औरंगजेब अपनी मौसी से मिलने एक बार बुरहानपुर गए थे।

वहां पर उन्होंने हीराबाई जैनाबादी को देखा और उनसे अपना दिल हार बैठे। हीराबाई एक गायिका और नर्तकी थीं।

वे बुरहानपुर में ही कहीं जा रहे थे तब उन्होंने हीराबाई को एक पेड़ से आम तोड़ते हुए देखा और उन्हें देखते ही मुझे प्रेम में दीवाने हो गए

उनका प्रेम हीराबाई के लिए यहां तक पहुंच गया था कि उन्होंने अपने जीवन में कभी शराब न पीने की कसम खा रखी थी, हीराबाई के प्रेम के लिए हुए अपनी एक कसम तोड़ने के लिए भी तैयार थे।

औरंगजेब शराब का पहला घूंट पीने ही जा रहे थे कि हीराबाई ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

हालांकि उनकी प्रेम की एक साल बाद ही हीराबाई का इंतकाल हो गया। इसके बाद हीराबाई को औरंगाबाद में ही दफन कर दिया गया।

अगर दारा शिकोह ने राजपाठ संभाला होता

भारतीय इतिहास का एक अन्य सवाल यह है कि यदि औरंगजेब दारा शिकोह ने मुगल गद्दी संभाली होती तो उसके क्या परिणाम होते ?

इसका जवाब देते हुए अपनी किताब में ऑडरी लिखती हैं कि दारा शिकोह औरंगजेब की तरह शासनकाल नहीं चला पाते।

उनके अंदर न तो शासन चलाने की इच्छा थी और ना क्षमता थी।

औरंगजेब की राजनीतिक समझ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुगल बादशाह शाहजहां के समर्थन के बावजूद दारा शिकोह औरंगजेब का मुकाबला नहीं कर पाए।

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