ये होते हाइपरसोनिक हथियार ? ये होती हैं इनकी विशेषताएं।

चीन ने हाल ही में हाइपरसोनिक प्यार का परीक्षण किया है। इस बात का जिक्र अमेरिका ने भी किया है। लेकिन चीन ने अमेरिका की किस बात का खंडन किया है। चीन ने हाइपरसोनिक हथियारों का परीक्षण किया है या नहीं। यह तो अलग बात है लेकिन हमारे लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि भारत के पास भी ऐसा कोई हथियार है या फिर भारत भविष्य में इस तरह का कोई हथियार बनाने की योजना भी बना रहा है। सोचने और समझने वाली बात यह भी है कि जब हमारे पड़ोसी देश के पास इस तरह के हथियार हैं तो हमें भी इस बारे में जानना बेहद आवश्यक है कि हमारे पास ऐसे हथियार हैं भी या नहीं।

इससे पहले चीन ने सन 2019 1 अक्टूबर के दिन ध्यान में चौराहे पर DF17 मिसाइल का परीक्षण किया है। यह मिसाइल चीन की नई अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इस मिसाल की खास बात यह है कि यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। इसकी सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह भी है यह मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड सिस्टम से लैस है। इसका मतलब यह हुआ कि यह समुद्र के ऊपर बहुत कम ऊंचाई पर भी तेजी से उड़ सकने में सक्षम है।

हाइपरसोनिक हथियारों के बारे में जानें ?

साधारण तौर पर अगर हम बात करें तो हाइपरसोनिक हथियारों का सीधा मतलब यह होता है कि यह हथियार ध्वनि की गति से भी 5 गुना ज्यादा गति से चल सकते हैं। मतलब जो हथियार हवा में 6115 किलोमीटर घंटा की रफ्तार से उड़ सकते हैं। वे हथियार हाइपरसोनिक कहलाते हैं। ये हथियार समुद्र से 12 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकते हैं। इनके पीछे भागना मुश्किल हो जाता है। हाइपरसोनिक हथियारों की सबसे खास बात यह होती है कि एक कम ऊंचाई पर भी बहुत तेज गति से उड़ सकता है। अपने टारगेट को आसानी से पकड़ सकता है और पीछा करके ध्वस्त करने में भी सक्षम होता है।

चीन के DF 17 में कम ऊंचाई पर उड़ने में क्षमता है। चीन का यह उपक्रम वैसे तो बैलेस्टिक मिसाइल है लेकिन यह हाइपरसोनिक हथियार की तरह भी काम करने में सक्षम है। इसका अगला हिस्सा ग्लाइडर की तरह बना है। और उसके अगले हिस्से में पंख लगे हुए हैं। जो कम ऊंचाई पर ग्लाइड करने की क्षमता प्रदान करते हैं। यह मिसाइल 1800 से 2000 किलोमीटर की रेंज में आने वाले अपने टारगेट को ध्वस्त करने में सक्षम होता है।

चीन विकसित कर रहा है बेहद घातक हाइपरसोनिक हथियार

चीन ने फिलहाल हाइपरसोनिक हथियार DF ZF का परीक्षण किया है। उसने पूरी दुनिया को इस बात की जानकारी नहीं दी है। परंतु चीन द्वारा विकसित यह हथियार 6173 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से लेकर 12360 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक चल सकने में सक्षम होता है। यह मिसाइल की तरह कार्य करता है। यह पारंपरिक और परमाणु हथियार भी ले जाने में सक्षम है। पहले यह तैयार हो जाते हैं उसके बाद अपने टारगेट पर निशाना साधते हैं।

हाइपरसोनिक हथियार के प्रकार

मुख्य रूप से है हाइपरसोनिक हथियार दो प्रकार के होते हैं। पहला ग्लाइड व्हीकल जिसका मतलब है यह हवा में तैरने वाला हथियार, दूसरे नंबर पर आता है क्रूज मिसाइल। फिलहाल पूरी दुनिया का फोकस ग्लाइड व्हीकल पर है। इसके पीछे छोटी सी मिसाइल लगाई जाती है। इस मिसाइल को लांचर से छोड़ा जाता है। थोडी दूरी तय करने के बाद यह मिसाइल से अलग हो जाती है और उसके बाद आसानी से टारगेट पर हमला कर देता है। इन हथियारों पर स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। इसका काम होता है हवा में जो ऑक्सीजन मौजूद होती है उसका इस्तेमाल करके तेजी से उड़ान करना। ऐसा करके उसे तेज गति और ऊंचाई भी मिल जाती है।

हाइपरसोनिक हथियार किसके पास हैं ?

फिलहाल पूरे संसार में केवल 3 देशों के पास हाइपरसोनिक हथियार हैं। इनमें चीन अमेरिका और रूस प्रमुख इन हथियार को विकसित करने की श्रेणी में भारत जापान ऑस्ट्रेलिया जर्मनी और उत्तर कोरिया शामिल है। यह हथियार आईबीएम में लगा कर छोड़ा जाता है। रूस ने इस हथियार को अपनी सेना में साल 2019 में शामिल किया था। संभावना जताई जा रही है कि चीन के पास फिलहाल दो हाइपरसोनिक हथियार हैं। अमेरिका के पास भी हाइपरसोनिक हथियार हैं

भारत के पास क्या है ?

भारत इस वक्त हाइपरसोनिक ग्लाइडर हथियारों पर काम कर रहा है। भारत में इनका परीक्षण भी पूरा कर लिया है। डीआरडीओ यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने मानव रहित स्क्रैमजेट का है पर सोने की स्पीड फ्लैट का सफल परीक्षण साल 2020 में पूरा किया था।

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