जीका वायरस क्या है ? ये कोरोना और डेंगू से कैसे अलग है ?

हमारा देश अभी कोरोनावायरस से अभी तक ठीक से जीत भी नहीं पाया है कि डेंगू ने पूरे देश की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

डेंगू के साथ-साथ जीका वायरस के मामलों ने भी स्वास्थ्य विभाग की माथे पर चिंता की लकीरें बना दी हैं। खबरों की माने तो अकेले कानपुर में ही जीका वायरस के 10 लोगों की पहचान हो चुकी है।

जीका वायरस के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एलर्ट पर है।

जीका वायरस फैलाने के लिए एडीज मच्छर ही जिम्मेदार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मच्छर बेहद खतरनाक और जानलेवा भी साबित हो सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरे संसार में अभी तक जीका वायरस का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है।

न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए बल्कि आम जनमानस के बीच सबसे बड़ी समस्या यह है कि मरीज के लिए कोरोना डेंगू और जीका भारत में अंतर कर पाना बेहद कठिन साबित हो रहा है। यही कारण है कि यह और भी जानलेवा होता जा रहा है।

क्योंकि जीका वायरस और डेंगू दोनों ही मच्छरों से फैलता है। इसीलिए सरकार ने सभी से यह अपील की है कि जितना हो सके मच्छरों से बचाव रखिए।

आइए जानते हैं कि जीका वायरस और डेंगू और कोरोनावायरस क्या अंतर होता है ?

जीका वायरस क्या है और इसके लक्षण क्या हैं ?

जीका वायरस की जानकारी वाराणसी एक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ• मृत्युंजय पाठक ने जीका का भारत के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक मच्छर से पैदा होने वाली बीमारी है।

इसके लिए जिम्मेदार है मच्छरों की जातियों का एडीज मच्छर। यही डेंगू और चिकनगुनिया के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है।

जीका वायरस के मरीजों में इसके लक्षण समानतः नजर नहीं आते या फिर हम यह यूं कहें के इसके लक्षण बेहद हल्के होते हैं।

जीका वायरस के लोगों में बुखार , जोड़ों का दर्द ,आंखों के पीछे दर्द और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

जीका वायरस के अलावा डेंगू में भी इसी तरह के लक्षण होते हैं। यही कारण है कि लोगों में जीका वायरस को लेकर भ्रम पैदा हो जाता है।

सबसे कठिन बात यह है कि जीका वायरस गर्भवती महिलाओं के लिए भी बेहद हानिकारक होता है।

जीका भारत महिलाओं के अंदर पल रहे बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

ऐसे फैलता है जीका वायरस

डा• मृत्युंजय बताते हैं कि जीका वायरस संक्रमित मच्छरों से तो चलता ही है इसके साथ ही जिन इलाकों में जीका वायरस फैल रहा है। वहां पर यदि आप यात्रा कर रहे हैं तब भी जीका वायरस की चपेट में आ सकते हैं।

इसके अलावा जीका वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त से भी फैल सकता है। जीका वायरस के लक्षण साधारण फ्लू की तरह होते हैं।

यही कारण है कि मरीजों को इसके लक्षण पहचानने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

जो लोग जीका वायरस से प्रभावित होते हैं और लोगों के मस्तिष्क और आंखों को बेहद गंभीर खतरा होता है।

इलाज और बचाव

डॉक्टरों की मानें तो फिलहाल पूरे संसार में जीका वायरस का कोई स्थाई इलाज मौजूद नहीं है। इस रोग के रोगियों को डॉक्टर सलाह देते हैं कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए।

खाने की अपेक्षा तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करना चाहिए और इसके लक्षण कम करने की दवाइयों की सलाह दी जाती है।

फिर आज जीका वायरस को खत्म करने के लिए कोई टीका भी मौजूद नहीं है।

इस वायरस को रोकने के लिए डॉक्टर एक सलाह और भी देते हैं कि जहां जीका वायरस का प्रकोप है वहां पर कम से कम यात्रा करें।

जीका , डेंगू और कोरोना में अंतर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि फिलहाल की परिस्थितियों को अगर देखा जाए तो तीनों ही वायरस बेहद खतरनाक हैं।

दुर्भाग्य की बात यह है कि इन तीनों के ही लक्ष्य एक जैसे होते हैं। तीनों का समय रहते इलाज भी आवश्यक है।

इन तीनों वायरस की चपेट में आने वाले लोगों को बुखार आना आम बात है। कोरोना के मरीजों को गंध न आने के साथ-साथ सांस लेने में समस्या भी हो सकती है।

जबकि जीका और डेंगू के मरीजों में गंध और सांस जैसी कोई समस्या देखने को नहीं मिलती है।

डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स बहुत तेजी से डाउन होते हैं। जब कोरोनावायरस और जीका वायरस में प्लेटलेट्स कम होना असामान्य बात है।

यही कारण है कि इसके इलाज के लिए खून की जांच कराना बेहद आवश्यक है।

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