अपने डेरे के पुरुष साधुओं के अं$कोष कटवाने के ये तरीके अपनाता था बाबा राम रहीम

रंजीत सिंह की जान लेने के जुर्म में दोषी पाए गए गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी है। गुरमीत राम रहीम के अलावा चार और दोषियों को भी अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई।

इन चारों अपराधियों के नाम हैं जसवीर सबदिन, इंदर सेन, अवतार और किशन लाल इन अपराधियों में इंदर सेन की साल 2020 में मृत्यु हो चुकी है। इसीलिए बाकी बचे चार अपराधियों की जिंदगी जेल में ही कटेगी।

आज हमेशा आर्टिकल के माध्यम से आपको बाबा राम रहीम के उन जिन्होंने कृत्यों की कहानी सुनाएंगे जिन्हें सुनकर आपको घृणा हो जाएगी।

राम रहीम अपनी महिला साध्वियों के साथ न केवल जबरदस्ती संबंध स्थापित करता था। बल्कि अपने आश्रम की पुरुष साधुओं को नपुंसक यानी बधिया बना देता था।

बाबा राम रहीम के घिनौने कृत्यों के कारनामे एक किताब के जरिए सबके सामने आए हैं। यह किताब सामने आने से पहले इस तरह के कृत्य सबके सामने हीं आए थे।

किताब का नाम है

डेरा सच्चा सौदा एंड गुरमीत राम रहीम- ए डिकेड लाॅन्ग इनवेस्टिगेशन

भाषा :- अंग्रेजी
लेखक :- अनुराग त्रिपाठी
प्रकाशक :- पेंग्विन
कीमत :- ₹ 299

मुझ पर रहमत हो गई यानि अंडीकोष निकलवाना

गुरमीत राम रहीम अपने आश्रम में मौजूद महिला साधुओं को अपने से@स सिलैब मानता था।

महिलाओं के अलावा जो पुरुष साधु उसके आश्रम में काम करते थे, वे साधु मुख्यत: दो तरह के काम करते थे। जानवरों की तरह काम करना और फिर रात को नशे की रोटी खाकर सो जाना।

इन साधुओं में जो कोई साधु हष्ट-पुष्ट हुआ करते थे। उनको राम रहीम अपने पर्सनल आर्मी में शामिल करने के लिए ट्रेनिंग करवाता था।

इसके अलावा जो उनमें भी बहुत ज्यादा मजबूत हुआ करते थे उनको राम रहीम अपनी सुरक्षा के लिए चुनता था।

जिन साथियों को राम रहीम अपने निजी सेवा करता था, उनके अंडकोष सर्जरी के द्वारा निकलवा देता था। सीबीआई ने इस मामले में कोर्ट में अपने चार्जशीट दाखिल की है।

बाबा राम रहीम के घिनौने कृत्य को इसके आश्रम में रहे भूतपूर्व पुरुष साधुओं ने बताया है। उन साधुओं से बाबा राम रहीम के आश्रम में एक साधु रहे जिनका नाम है हंसराज।

हंसराज हरियाणा के फतेहगढ़ जिले के रहने वाले हैं। बाजीगर दलित समुदाय से संबंधित हैं। बेहद गरीब घर से आते थे।

गले में मधुर आवाज से परिवार डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा था। यही कारण था कि हंसराज भी अपने परिवार के साथ जुड़ गए। मधुर आवाज होने के कारण हंसराज को यहां पर गाने का मौका मिल गया।

परिवार के लोगों पर डेरा सच्चा सौदा की अन्य कर्मचारियों ने जब हंसराज के परिवार पर भावनात्मक दबाव डाला तो हंसराज के परिवारी जनों ने हंसराज को हमेशा-हमेशा के लिए डेरे को सौंप दिया।

हंसराज यहां आकर साधु बन गए। हंसराज की कहानी अब हम उन्हीं की जुबानी बताएंगे।

यह बात 1999 की है, जब हम सब साथियों के बीच एक बार सुनने में आई थी डेरा सच्चा सौदा के डॉक्टरों ने एक घोड़े के अंडकोष काट दिए। जिसके 3 महीने बाद वह घोड़ा मर गया।

उसके बाद हम लोगों को यह बात सुनने को मिली कि पिताजी (जोकि गुरमीत राम रहीम का नाम था) ने भी इंसानों पर यह प्रयोग करने का विचार किया साल।

1999 के आखिर में डेरा सच्चा सौदा की मैनेजमेंट ने 500 साधु को बुलाया और इन सब को यह बताया है कि उनके साथ केवल एक छोटी सी सर्जरी की जाएगी।

उसके बाद सीधे ईश्वर के संपर्क में आ जाएंगे। जिन साथियों ने यह सर्जरी कराने से इंकार कर दिया।

उनको उत्पीड़न कक्ष में डाल दिया। अंडकोष निकलवाने वालों में सबसे पहले गुरमीत राम रहीम के दो व्यक्तिगत कुक को लिया।

उनकी सर्जरी कराके उनसे कहा गया कि तुमको अपनी सच्चाई के बारे में कुछ नहीं बताना है। बल्कि अफवाह फैलाना है कि अंडकोष निकलवाने के बाद उनका जीवन और आध्यात्मिक हो गया है।

इन्हीं दोनों साधुओं को नौजवानों के कंधे पर और साधुओं को नपुंसक कराने की जिम्मेदारी दी गई।

यह बात साल 2000 की है, जब हमेशा की तरह हंसराज गुरमीत के सत्संग में भजन गाने गया तो अचानक गुरमीत ने हंसराज से कहा कि तुम पर रहमत हो गई है। तुम्हें जल्दी ही ईश्वर के साक्षात दर्शन होंगे।

हंसराज की उम्र उस वक्त 17 साल की थी। बाबा राम रहीम ने हंसराज से कहा कि वो उनके गांव गुरुसर मोडिया जाएं और वहां पर डॉक्टर पंकज गर्ग और डॉक्टर एमपी सिंह से मिलकर उनसे कहें कि मुझ पर रहमत हो गई।

बाबा की बात मान कर हंसराज शाम को वहां पहुंचा तो उसने बाबा की बताए शब्द डॉक्टर से बोल दिए।

जब डॉक्टर ने उनके शब्द सुने तो डॉक्टर आपस में मुस्कुराए और उन्हें कोल्ड ड्रिंक पीने को दी।

कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद उसे नशा हो गया और जब उसकी आंख खुली तो उसके अंडकोष गायब थे। यानि उसे बधिया या नपुंसक कर दिया गया था।

यह सब हो जाने के बाद हंसराज का जैसे जीवन समाप्त हो गया। लेकिन अब वह अपनी बात कैसे बताएं और किस से कहें और कहां जाए ?

हंस राज इस संबंध में अन्य साधुओं से बात की तो उन्होंने भी बताया कि अन्य साथियों के साथ भी ऐसा किया जा चुका है।

कुछ समय तक तो हंसराज शांत रहें लेकिन एक दिन हिम्मत करके हंसराज ने अपने परिवार को खुद पर बीती बता दी। इसके बाद हंसराज के घरवाले हंसराज को अपने घर ले गए।

लेकिन उसके बाद हंसराज के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। डेरा के लोग उन्हें आकर परेशान करते। जिस गांव में हंसराज रहते उस गांव के लोगों ने तंग किया करते थे।

गुरमीत के पहुंच इतनी थी कि हंसराज जहां भी नौकरी करने जाता उसे वहां से नौकरी से निकाल दिया जाता। उसके परिवार वालों भी उसके आतंक जितने परेशान थे कि मैं एक एक कर सब गुजर गए।

हंसराज आज अकेले ही संगीत सिखा कर अपना वक्त गुजार रहे हैं। अकेले हंसराज ही नहीं बल्कि सैकड़ों साधु ऐसे हैं जो नपुंसक हैं।

हंसराज तो वहां से भाग आए लेकिन वे सभी साधु आज भी अन्य साधुओं को नपुंसक बनाने का काम कर रहे हैं।

बाबा राम रहीम के नपुंसक साधु पर राम रहीम का इतना प्रभाव था कि एक साधु ने अंबाला में गुरमीत की पेशी के दौरान अपनी जान ले ली थी।

बाद में मृत साधु का नोट प्राप्त हुआ तो पता जिसमें उसने लिखा था कि वह गुरमीत राम रहीम को कोर्ट में पेश करने के खिलाफ है और

बाबा की पेशी चलते वह अपना जीवन समाप्त कर रहा है। इसके बाद अगली पेशी पर भी एक और साधु ने अपनी टीम लीला समाप्त कर ली।

जब डॉक्टरों ने इन दोनों का ही पोस्टमार्टम किया तब पता लगा कि इन दोनों के अंडकोष भी गायब थे।

दोस्तों इन ढोंगियों ने केवल हमारा बल्कि धर्म का नुकसान किया है। इस संसार में ईश्वर से महान न तो कोई है और न कोई और हो सकता है। सदैव ईश्वर में आस्था रखिए बाबाओं में नहीं।

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