रावण का किरदार नहीं निभाना चाहते थे अरविंद त्रिवेदी। इस एक्टर की सलाह मानकर निभाया ऐतिहासिक किरदार

पुरानी रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले लोकप्रिय कलाकार अरविंद त्रिवेदी का निधन हो गया।

वे अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उन्होंने टीवी सीरियल रावण का जो ऐतिहासिक किरदार निभाया था।

उसके लिए वे हमेशा जनमानस के हृदय में अमिट स्थान बनाए रखेंगे। उनका 82 साल की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया था।

अरविंद त्रिवेदी ने इससे पहले भी कई कार्यक्रमों में अदाकारी की थी लेकिन उनको कोई नहीं जानता। रावण की भूमिका ने उनको हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया।

रावण के रोल ने उनको इतनी प्रसिद्धी दी की लोग उन्हें अपने अस जीवन में भी रावण समझने लगे थे।

अपने एक इंटरव्यू के दौरान अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि जब रामायण कार्यक्रम के लिए ऑडिशन हो रहे थे।

तब मैं भी वहां पर ऑडिशन देने गया था। लेकिन मैंने रावण की भूमिका के लिए नहीं बल्कि केवट की भूमिका के लिए ऑडिशन दिया था।

रामानंद सागर ने मुझे देखा तो मुझसे बोले तुम केवट नहीं बल्कि रावण के लिए चुने गए हो। इसके लिए उन्होंने मुझे अकेले में बात की और मुझे रावण की स्क्रिप्ट थी।

अपने ऑडिशन वाले दिन को याद करते हुए एक बार अरविंद त्रिवेदी ने बताया था कि जब रामानंद सागर ने मुझे रावण की स्क्रिप्ट पढ़ने को दी। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद जब मैं थोड़ी ही दूर तक चल पाया था।

रामानंद जी बहुत तेजी से उछल गए और बोले बस मुझे मिल गया मेरा लंकेश मिल गया मेरा रावण। उनको इस तरह से हंसते देखकर मैंने अपने आसपास देखा।

मैं इस बात से हैरान था कि मैंने अभी तक कोई भी डायलॉग भी नहीं बोला है। वे मुझे कैसे रावण कह रहे हैं ?

तब उन्होंने मुझसे कहा कि तुमने वह सब है जो मुझे रावण के किरदार के लिए चाहिए था।

एक इंटरव्यू में अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि उनका किरदार लोगों को इतना पसंद आया कि लोगों ने मेरा नाम ही लंकापति रावण रख दिया था।

वे कहते हैं कि और तो और मेरे बच्चे भी मुझे रावण और मेरी पत्नी को मंदोदरी कहने लगे थे।

अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि रावण का किरदार निभा कर मुझे इतनी प्रसिद्धि मिलेगी।

नहीं करना चाहते थे रावण का किरदार

मुंबई मिरर में एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें बताया गया था कि जब रामानंद सागर ने अरविंद त्रिवेदी को रावण का किरदार निभाने के लिए चुना था। तब उन्होंने इसे करने से इंकार कर दिया था।

इसके पीछे कारण यह था कि अरविंद त्रिवेदी एक कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल के साथ कार्य कर रहे थे।

उन्होंने इस बात का जिक्र परेश रावल से किया तो परेश रावल ने उनको अच्छे से समझाया। परेश रावल ने उन्हें रावण का किरदार निभाने के लिए प्रेरित किया।

परेश रावल ने अरविंद त्रिवेदी को समझाते हुए कहा कि जिंदगी मौके बार-बार नहीं देती। तुम्हें मौका मिला है तो उसको भुनाओ गंवाओ मत।

परेश रावल की बातें सुनकर अरविंद त्रिवेदी का हृदय परिवर्तन हो गया और फिर उन्होंने रावण की भूमिका स्वीकार कर ली।

लेकिन कोई नहीं जानता था कि रावण की भूमिका उन्हें अमर कर देगी। शायद इसीलिए कहा जाता है कि जिंदगी का हर एक फैसला सोच समझ कर देना चाहिए।

 

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