प्रियंका गांधी की कुछ बातें जो उनको अपनी दादी इंदिरा गांधी से अलग करती हैं

गांधी खानदान की बेटी प्रियंका गांधी जब लखीमपुर पहुंची तो वहां पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया।

प्रियंका गांधी को जहां रखा गया था वहां का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें प्रियंका गांधी है झाड़ू लगाते दिख रही हैं। प्रियंका गांधी के चाहने वाले उनमें इंदिरा गांधी की छवि तलाशते हैं।

इंदिरा गांधी लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद भारत के प्रधानमंत्री बनीं और साल 1959 में मात्र 38 साल की आयु में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था। इंदिरा गांधी ने अपने पूरे शासनकाल में अपनी शर्तों पर राज किया था।

चाहे वह आपातकाल ही क्यों ना हो ? लेकिन प्रियंका गांधी के साथ वे परिस्थितियां नहीं है जैसी इन्दिरा गांधी की साथ थीं।

प्रियंका गांधी के के सामने जटिल परिस्थितियों है जिनमें भाजपा के कथित हिंदुत्व की आंधी है और इनमें भी सबसे बड़ी समस्या माँ सोनिया गांधी का राहुल गांधी के प्रति ज्यादा झुकाव रखती हैं। यह बातें प्रियंका गांधी को इंदिरा गांधी के नक्शे कदम चलने से रोकती हैं।

डॉ आनंद कुमार जो कि जेएनयू के भूतपूर्व प्रोफेसर हैं और फिलहाल राजनीतिक विशेषज्ञ हैं।

वे मानते हैं कि प्रियंका के राजनैतिक सफर की शुरुआत अभावों से हुई है। उन्होंने बताया कि कई बातें ऐसी हैं जो उन्हें अपनी दादी इंदिरा गांधी से अलग करती हैं।

भाजपा से हिन्दुत्व का संघर्ष

देश में इस वक्त हिंदुत्व की बयार बह रही है। ऐसी स्थिति में प्रियंका गांधी को भाजपा के हिंदुत्व से पार पाना बेहद जटिल कार्य है। उनको पार्टी संगठन से फ्री हैंड भी नहीं मिल पा रहा है।

भाजपा सरकार ने जिस तरह से हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाया है उसका तोड़ पाना कांग्रेस और प्रियंका गांधी दोनों के लिए ही बेहद कठिन कार्य है।

इस सब के अलावा प्रियंका गांधी को इस सब का भी डटकर सामना करना है। भारतीय राजनीति में समय पुरुषवाद का समय है।

संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का मुद्दा दब कर रह गया है। इस बात को कौन नहीं जानता।

इसके अलावा कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी भी जमकर हावी है। प्रियंका गांधी को अपनी दादी इंदिरा गांधी की तरह बनने में अभी और समय लग सकता है।

इंदिरा गांधी ने सबसे पहले अपनी पार्टी के अपने विरोधियों का सामना करना पड़ा था।

लेकिन उन्होंने खुद को स्थापित कर ही लिया था। परिणामस्वरूप उनके विरोधी भी उनका बाल भी बांका ना कर पाए थे।

इस सबके अलावा कांग्रेस में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोनिया गांधी की तरफ से प्रियंका गांधी को उतनी तवज्जो नहीं मिल रही है जितनी कि राहुल गांधी को दी जा रही है।

इससे न केवल पार्टी कार्यकर्ता बल्कि सभी बड़े अधिकारी भी असमंजस की स्थिति में है कि पार्टी किसको आगे बढ़ाएं और किसको नहीं।

जनता को पसंद आ रहा है उनका साथ

प्रोफेसर आनंद आगे बताते हैं कि यह बात तो ठीक है कि प्रियंका गांधी को अपने पति रावर्ट वाड्रा की तरफ से तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लेकिन इस सबके बावजूद प्रियंका गांधी ने आम जनता के मन में अपनी छवि एक निडर नेता के रूप में बनाई है।

कांग्रेस पार्टी की इस समय सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसका जनता से जुड़ाव नहीं हो पा रहा है।

पार्टी के नेता जनता से संपर्क ही नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी एक उम्मीद की किरण कही जा सकती हैं।

लोग उनके तरीके को पसंद कर रहे हैं। इस समय कहावत अच्छे से चरितार्थ है कि कांग्रेस के पास नेता ज्यादा है कार्यकर्ता कम हैं।

कांग्रेस के अनुषांगिक संगठन जैसे ट्रेड यूनियन, दलित उत्थान और किसान कांग्रेस पार्टी के एजेंडे में कहीं नहीं दिखते।

पार्टी में इस समय जनता से तालमेल करने वाले कार्यक्रम भी नहीं दिखते हैं। कांग्रेसी नेता स्वयं ही अपने आपसी गुटबाजी में उलझे रहते हैं।

आम जनता के बीच जाना ही होगा

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जनता की नब्ज को टटोला। उन्होंने ऐसे मुद्दे उठाए जिनको सुनकर आम जनता भाजपा की तरफ खिंचती चली गई।

उस समय भ्रष्टाचार मुक्त भारत के नारे ने तो कमाल ही कर दिया था। इस सबके अलावा भाजपा हिंदुत्व की राजनीति को खुलकर खेल रही है।

यह कहावत बहुत पुरानी है कि जो राजनीतिक पार्टी भविष्य को ध्यान में रखकर राजनीति नहीं करती है वह खत्म हो जाती है।

उत्तर प्रदेश मे समाजवादी पार्टी यादव और मुसलमानों को अपने एजेंडे में शामिल लगती है।

इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्व के एजेंडे पर कार्य करती है। ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस के लिए बेहद जटिल प्रश्न किया है।

प्रोफेसर आनंद कुमार कहते हैं कि देश में इस समय आर्थिक विषमता का माहौल है। किसानों ,बुनकरों और युवाओं की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

देश में इस समय सामाजिक एकता को तोड़ने का माहौल चल रहा है। इस समय समाज में जहर घोलने की राजनीति चल रही है। लेकिन कांग्रेस इन मुद्दों को भुना नहीं पा रही है।

प्रोफेसर आनंद कहते हैं कि प्रियंका गांधी बेदाग चेहरा हैं। प्रियंका गांधी ममता बनर्जी और मायावती से अच्छी राजनीति कर सकती हैं क्योंकि उन्हें युवा होने का लाभ मिल सकता है।

प्रियंका गांधी के पास नेता तो है कार्यकर्ता नहीं है इसीलिए प्रियंका को सबसे पहले आम जनता से मिलना होगा।

कांग्रेस पार्टी जिस तरह से ट्विटर पर अपनी राजनीति करती है यह उसके भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।

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