कौन है वह महिला जिसको देखकर RCB के खिलाड़ी बार-बार मुस्कुरा रहे थे ?

आईपीएल इस समय चल रहा है और सोमवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मुकाबला खेला गया था।

इस मैच में आरसीबी के तेज गेंदबाज काइल जेमिसन मैदान पर कोई बहुत ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे।

परंतु मैदान से बाहर वे एक अलग ही काम में व्यस्त थे। उनकी एक फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।

एक जगह पर पैवेलियन में हुए थे उनके पास एक लड़की बैठी थी और वे उस लड़की को देखकर बार-बार मुस्कुरा रहे थे।

उनकी इस फोटो के बाद से इस लड़की के बारे में चर्चाएं शुरू हो गई यह लड़की कौन है ?

जिस लड़की को आरसीबी के तेज गेंदबाज बार-बार देख रहे थे और वह लड़की आरसीबी गेट डगआउट में बैठी थी।

वह लड़की आरसीबी की मसाज थेरेपिस्ट हैं इनका नाम नवनीता गौतम है।

IPL 2020 में पहली बार किसी महिला को मसाज थेरेपिस्ट के रूप में शामिल किया गया है। सभी लोग आरसीबी के इस कदम की सराहना कर रहे हैं।

क्योंकि आईपीएल में टीम स्टाफ में महिलाओं की भूमिका ना के बराबर रहती है।

केकेआर और आरसीबी के बीच इस मैच मैच में जब आरसीबी के बल्लेबाज केकेआर की गेंदबाजों के सामने घुटने टेक रहे थे।

तब आरसीबी के बल्लेबाज का का अपनी बल्लेबाजी का इंतजार कर रहे थे।

तब काइल जेमिसन आरसीबी की मसाज थेरेपिस्ट नवनीता गौतम को देख कर बार-बार मुस्कुरा रहे थे।

इतना ही नहीं नमिता गौतम भी उनको देखकर बार-बार मुस्कुरा रही थीं। यह उस समय की घटना है जब आरसीबी के 54 रनों पर 4 विकेट गिर चुके थे।

उस दौरान पवेलियन में बैठे विराट कोहली और सभी खिलाड़ी बेहद चिंतित नजर आ रहे थे लेकिन काइल जेमिसन अपनी अलग ही दुनिया में मस्त थे।

कौन हैं नवनीता गौतम

ललिता गौतम वेंकूवर, ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा की रहने वाली है। नवनीता का जन्म 11 अप्रैल 1992 को हुआ था।

उन्होंने अपनी प्राइमरी शिक्षा बैंकुवर में ही ले थी। वहां पर ही थेरेपी कोर्स किया था। सबसे पहले उन्होंने बतौर इंटर्न काम किया था

और उसके बाद उन्होंने खेलों की तरफ कदम बढ़ा दिया। इससे पहले नवनीता गौतम टोरंटो नेशनल ग्लोबल T20 कनाडा में भी काम कर चुकी हैं।

इसके अलावा नवनीता गौतम भारतीय महिला बॉस्केटबॉल टीम का हिस्सा भी रही थीं और वे उस वक्त सहायक स्टाफ के पद पर कार्यरत थीं।

एक इंटरव्यू दौरान जब नवनीता से पूछा गया कि उनको मर्दो के बीच काम करना अजीब नहीं लगता है तब उन्होंने कहा मुझे ऐसा कुछ भी फील नहीं होता है।

मैं हमेशा यह महसूस करती हूं कि मैं 20 भाइयों के आसपास रह रही हूं। धीरे-धीरे ही सही लेकिन समाज में परिवर्तन हो रहा है।

मैं मानती हूं कि यदि आपके साथ खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ अच्छा फील कर रहा है। तब आपको महिला या पुरुष होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

हम सभी खिलाड़ियों की स्वास्थ्य देखभाल करते हैं और इसके लिए हम तनख्वाह भी लेते हैं।

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