यूपीएससी टॉपर ने कहा इतने घंटे मन लगाकर पढ़ाई करो और पास करो यूपीएससी की परीक्षा

अभी यूपीएससी 2020 का फाइनल रिजल्ट अनाउंस किया गया है। इस परीक्षा में बिहार के शुभम कुमार ने टॉप किया है।

शुभम की इस कामयाबी से न केवल उनका परिवार बल्कि हर एक बिहारी गदगद है।

सामान्यतः इससे पहले के टॉपर से जब उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा जाता था तो वे 18 से 20 घंटे पढ़ाई की बात करके औरों को गुमराह किया करते थे।

लेकिन शुभम कुमार ने बताया है कि यदि आप 7 से 8 घंटे रोजाना गहन अध्ययन कर लेते हैं तो आपको यूपीएससी पास करना कोई बड़ी बात है।

आइए जानते हैं कि शुभम ने यह परीक्षा कैसे पास की और इससे पास करने की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली ?

2018 में शुरु किया अध्ययन

शुभम ने साल 2018 से यूपीएससी की परीक्षा पास करने की तैयारी शुरू की। 2018 से लेकर परीक्षा टॉप करने तक शुभम को कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरना पड़ा। लेकिन उन्होंने इस सब को नजरअंदाज करके अपनी पढ़ाई जारी रखी।

कोरोनावायरस महामारी के कारण उनकी पढ़ाई में थोड़ा व्यवधान जरूर उत्पन्न हुआ लेकिन उन्होंने खुद को मोटिवेट बनाए रखा। उनको उनके परिवार का भरपूर समर्थन मिला।

शुभम कहते हैं कि मेरी जॉइंट फैमिली है मेरे पिता उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में कार्यरत हैं। इन सभी के प्यार और सहयोग के चलते आज मैंने यह मुकाम हासिल किया है।

बड़ी बहन का था सबसे ज्यादा समर्थन

शुभम बताते हैं कि उन्होंने आज जो कुछ भी हासिल किया है उसमें उनकी बड़ी बहन का बहुत सपोर्ट है।

शुभम की बहन इंदौर में साइंटिफिक ऑफिसर है और वे लगातार शुभम को आईएएस बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। घर में मम्मी-पापा का सबका योगदान रहा।

आईएएस में टाॅप करने से पहले शुभम इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस डिपार्टमेंट में सलेक्शन हो चुका था लेकिन शुभम आईएएस बनना चाहते थे और उन्होंने लगातार अपनी तैयारी जारी रखी।

इसीलिए आईएएस बनना चाहते थे शुभम

यूपीएससी की परीक्षा में प्रथम स्थान का प्राप्त करने वाले शुभम कुमार चाहते हैं कि उनको बिहार कैडर के दिया जाए। उनका कहना है कि बिहार में रहकर ही बिहार के लिए अपना सब कुछ देना चाहते हैं।

यदि उन्हें बिहार कैडर न भी दिया जाए तो वह चाहेंगे कि उन्हें मध्यप्रदेश दिया जाए। शुभम के पिता का नाम देवानंद सिंह है और

उन्होंने बातचीत में बताया कि शुभम शुरू से ही पढ़ाई में काफी होशियार था और शुभम की मेहनत और लगन देखकर हमने उन्हें किसी बात की कोई परेशानी नहीं होने दी।

एक घटना ने तय की आईएएस बनने की राह

शुभम ने सबसे पहले पूर्णिया में पढ़ाई की। उसके बाद कटिहार में पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने पटना में पढ़ाई की और

उन्होंने बोकारो से 12वीं की परीक्षा पास की। मुंबई आईआईटी से शुभम ने सिविल इंजीनियरिंग मैं ग्रेजुएशन किया है।

एक किस्सा याद करते हुए शुभम ने बताया कि जब वे छठी क्लास में थे तब वह कटिहार में पढ़ा करते थे।

कटिहार में उन्होंने एक सवाल का जवाब लिखा था तो उनके वहां पर तैनात अध्यापक ने उनके सवाल को गलत बता दिया था।

जबकि शुभम का कहना है कि उनका वह सवाल जवाब बिल्कुल सही था। बावजूद इसके शिक्षक ने उनकी बात नहीं मानी।

शिक्षक के इस व्यवहार से शुभम को बहुत तकलीफ हुई और फिर उन्होंने स्कूल बदलने की सोची और वे पढ़ाई करने पटना चले आए।

इस बार बिना कोचिंग मचा दी धूम

शुभम कहते हैं कि इस बार उन्होंने कोई कोचिंग नहीं ली। वे रोजाना करीब 7 से 8 घंटे की पढ़ाई करते थे और

जब उन्होंने प्री क्वालीफाई कर लिया था तब वे 8 से 10 घंटे तक की पढ़ाई रोजाना करने लगे थे।

उनकी मां बताती हैं कि शुभम शुरू से ही पढ़ाई में तेज था। शुभम बचपन से लेकर आज तक टाॅप ही करते आए हैं।

शुभम की मां कहती हैं कि शुभम के बाद अब और भी बच्चे बिहार से टॉप करें और बिहार का नाम रोशन करें।

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