संत नरेंद्र गिरि की है सैकड़ो करोड़ की सम्पत्ति जानिए कौन होगा उनका उत्तराधिकारी ?

नरेंद्र गिरी की संपत्ति-

20 सितंबर 2021 को संदिग्ध परिस्थितियों में महंत नरेंद्र गिरी की मृत्यु हो गई। वे प्रयागराज में स्थित बाघम्बरी गद्दी पीठ और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे।

यह कहा जा रहा है कि नरेंद्र गिरी करोड़ों की संपत्ति के मालिक थे। उनकी संपत्ति उत्तर प्रदेश राज्य से लेकर अन्य चार राज्यों में फैली हुई है।

अकेले प्रयागराज की बात करें तो यहां निरंजनी अखाड़े के मठ की जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की बताई जा रही है।

मिर्जापुर, बड़ौदा, जयपुर और वाराणसी में भी करोड़ों की जमीन है।

नोएडा में भी करीब 50 बीघा जमीन और मुख्य मंदिर और मठ,आश्रम हैं।

इतनी संपत्ति कहां कहां तक फैली है ?

नरेंद्र गिरी की संपत्ति के बारे में जानकारों का कहना है कि बाघंबरी में लगभग 10 बीघे में फैली हुई बाजार में मठ की जमीन की कीमत 80 से 100 करोड़ों रुपए के बीच आंकी जा रही है।

इस मठ की सारी जमीन निरंजनी अखाड़े के सचिव के नाम पर है।

बाघम्बरी मठ और निरंजनी आंकड़े का प्रयागराज कौशांबी में तमाम जगह जमीनें है। इसकी कुल कीमत 130 करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है।

कुछ समय पूर्व की बात करें तो हनुमान मंदिर के आसपास भी जमीनों का विस्तार है। उनकी संपत्ति में काफी वृद्धि हुई है।

प्रशासनिक अनुमान है कि लगभग 5 बीघे की जमीन हनुमान मंदिर के आसपास है,जिसकी कीमत 40 से 50 करोड़ों रुपए है।

मठ के अधीन ही हनुमान मंदिर भी आता है। जिसकी निरंजनी अखाड़े की मांडा क्षेत्र में लगभग 400 बीघा जमीन है।

विवादों में आने लगी संपत्ति

महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। यह विवाद पिछले 6 महीने से नहीं बल्कि 8 से 9 साल पुराना विवाद है।

जब आनंद गिरि अपने गुरु की मृत्यु पर गिरफ्तार हुए तो पुलिस की पूछताछ पर वहां उन्होंने संपत्ति से जुड़े कई खुलासे किए है।

खुद के गुरु की जान लेने के आरोपों से घिरे आनंद गिरी ने अपनी सफाई देते हुए उन्होने अपने गुुरू पर यह आरोप लगाया कि उनके गुरु मठ जमीन बेचना चाहते था।

परन्तु महंत होने के कारण उनको मठ की जमीन बेचने का अधिकार नहीं है।

बता दें कि निरंजनी अखाड़ा 900 साल और बाघबंड़ी अखाड़े की गद्दी 300 साल पुरानी है।

आनंद गिरि ने यहां आरोप लगाया कि 2012 में गद्दी की 8 बीघा जमीन सपा के तत्कालीन विधायक को 40 करोड़ में बेच दी थी। आज वह बिल्डरों के पास है और वहां पर बिल्डिंग खड़ी हो गई है।

इसी विवाद को लेकर गुरु शिष्य आनंद गिरी और नरेंद्र गिरी के बीच में विवाद हुआ।

इसका खुलासा नरेंद्र गिरी की मृत्यु के बाद आनंद गिरि ने अपनी गिरफ्तारी की सफाई देते हुए किया कि दोनों के बीच यह जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था और इसी को लेकर आनंद गिरि निष्कासित हुए थे।

नरेंद्र गिरी का कोई उत्तराधिकारी नहीं है नियुक्त

नरेंद्र गिरी की मृत्यु के बाद एक बड़ा प्रश्न यह उठता है कि उनका कोई उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं है।

ऐसे में उनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा ? यह एक चर्चा का विषय सुर्खियों में बना हुआ है।

आखंडा परिषद के अध्यक्ष और यह निरंजन मठ की गद्दी के महंत की मृत्यु के बाद अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा ?

अब देखना यह है कि बाघम्बरी गद्दी की परम्परा के अनुसार किसको नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी घोषित किया जाता है इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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