गरीब अशोक चोटिया से संत आनंद गिरी बनने की कहानी !

आनंद गिरि पर अपने ही गुरु को ब्लैकमेल करने का आरोप है। बताया जाता है यही कारण नरेंद्र गिरी ने खुद ही अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। यही वजह है कि आनंद गिरी आजकल सुर्खियों में है।

आइए जानते हैं कि कौन है आनंद गिरि जो एक गरीब परिवार से होकर आज दो सौ करोड़ का मालिक बताया जा रहा है। जानिए इनका पूरा सच।

आनंद गिरि का जीवन परिचय

आनंद गिरि के बचपन का नाम अशोक चोटिया था। आनंद के पिता का नाम रामेश्वर लाल चोटिया था। आनंद चोटिया उर्फ आनंद गिरि के मित्र बताते हैं कि अशोक चोटिया बचपन से ही अमीर बनने के सपने देखता था।

वह पढ़ाई में वहां इतना कमजोर था कि एक बार सातवीं क्लास में उसके शिक्षक ने उसको पढ़ाई लिखाई ना करने पर एक तमाचा भी मार दिया था।

जिस कारण वह अपने अध्यापक से बहुत गुस्सा भी हुआ था।

उसके मित्र बताते हैं कि वह एक बार अपने घर से भागकर अपने एक मित्र के अहमदाबाद पहुंच गया था। उसके पिता रामेश्वर चोटिया ने उसके लौटने के लिए मंदिर में पूजा करवाई थी।

वह अपने घर से भागकर प्रयागराज पहुंचा था, वहीं उसकी ही मुलाकात नरेंद्र गिरी से हुई थी ।

वह नरेंद्र गिरी ने उसको शिष्य बना लिया। यहीं से शुरू हुआ बचपन के अशोक चोटिया के आनंद गिरि बनने का सफर।

आनंद गिरि जब बने साधु

इसी बीच में आनंद गिरी के घरवालों ने उन्हें बहुत ढूंढा परंतु वहां नहीं मिला। इसी दौरान आनंद के कुछ दोस्त एक मेले में पहुंचे और मेला में यह खबर मिली कि वहां उनका बचपन दोस्त अशोक चोटिया अब आनंद गिरि बन चुका है। जब यह जानकारी अशोक के पिता की हुई तक वे नरेंद्र गिरि के आश्रम पहुंचे।

नरेंद्र गिरी ने खुद अशोक के पिता रामेश्वर चोटिया को यह बताया कि उन्होंने ही आनंद गिरि को दीक्षा दी है।

परन्तु आंनद के पिता से आनंद की मुलाकात पर नहीं हुई। नरेंद्र गिरि ने आनंद के पिता को बताया कि अब और उसको अपना शिष्य बना लिया है।

आनंद गिरि के साधु बनने पर नहीं बदली उनके परिवार की आर्थिक स्थिति

आनंद गिरि साधु बनने के बाद अपने परिवार में उसके अलावा उनके तीन भाई और हैं। उनकी परिवारिक की आर्थिक स्थिति आज भी वही बनी हुई है, जो पहले थी।

उनके बड़े भाई भंवरलाल ने बताया कि लोग कहते हैं कि यह साधु बनने के बाद आनंद ने 2 करोड़ अपने परिवार को दिए।

परंतु आनंद के पिता का कहना है कि अगर ऐसा होता तो वह आर्थिक स्थिति में बदलाव आता।

भाई साधु बनने के बाद परिवार में आए तो जरूर परंतु उनके संत होने पर कोई परिवार की आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।

आनंद गिरि को था अपने गुरु से प्रेम

आनंद गिरि जब अपने घर से भागकर वह प्रयागराज पहुंचा तो सबसे ज्यादा उनका साथ नरेंद्र गिरी ने ही दिया था।

लेकिन अब लोगों का यहां तक कहना था कि वहां नरेंद्र गिरी को ब्लैकमेल कर रहे थे।

इस बात को उनके परिवार ने झूठ करार देते हुए यह कहा कि उनको अपने गुरु नरेंद्र गिरि से प्रेम था। महंत नरेंद्र गिरि के आत्महत्या करने की वजह आनंद नहीं हो सकते।

उनके परिवार ने दो करोड़ रुपए देने की बात को और वह नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल करने की बात को दोनों को झूठा बताया ।

मां के लिए आए अपने गांव

नरेंद्र गिरी के बारे में यह भी कहा जाता है कि उनको बड़ा संत बनने का और एक बड़ा आदमी बनने का बचपन से शौक था।

परंतु गांव के लोगों का यह कहना है कि वे पैसे के लिए है इतना नहीं गिर सकते कि वे किसी को ब्लैकमेल करें।

नरेंद्र गिरि ही वो मनुष्य थे जिन्होंने आनंद गिरि का साथ दिया और उसको एक बड़ा संत बनाया है।

अपने गुरु के साथ कोई ऐसा कैसे कर सकता है ? जब वे अपने गांव आए तब उन्होंने अपने गांव का पूरा चक्कर लगाया था।

उस दौरान उनको बहुत सी भी भिक्षा दी गई थी परंतु वे ₹ 1 भी अपने साथ लेकर नहीं गए थे। उनका माँ से प्रेम का स्तर यह था कि वह पूरी रात अपनी मां के पैरों में बैठे रहे।

आनंद गिरि को हुए भगवान शंकर के दर्शन

आनंद गिरि के बारे में उनके पिता रामेश्वर से पूछा गया कि आखिर कैसे इतना गरीब परिवार का आपका बेटा इतना बड़ा संत बन गए ? तो वहां होने बताया एक बार वे प्रयागराज गए थे।

वहां उन्होंने कुछ लोगों से बात की। जिसके बाद वहां के लोगों ने बताया कि आनंद गिरी एक बार अपना आश्रम छोड़कर गंगा किनारे बैठ गए थे।

उन्होंने 22 दिन तक तपस्या की और उनको साक्षात स्वयं भगवान शंकर के दर्शन हुए,

उसके बाद वह कहने लगे कि भगवान शंकर ने स्वयं आनंदगिरी को आशीर्वाद दिया।

जिसकी वजह से वे इतने बड़े संत बने तथा एक गरीब परिवार से अशोक चोटिया आनंद गिरि के नाम से जाने लगे हैं। यह सब भगवान शंकर के आशीर्वाद की देन है।

 

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