महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु से आखिर क्यों गिरफ्तार हुए आनंद गिरि ? !

कौन है नरेंद्र गिरी-

1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की स्थापना की गई थी और और 2015 में नरेंद्र गिरि को सर्व सम्मानित करते हुए अखिल भारतीय अखंडा परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु हो गई, यहां उन्होंने खुद मृत्यु को गले लगाया है या फिर उनकी किसी ने जान ले ली है,

यह रहस्य अभी बना हुआ है, परंतु वर्तमान समय में वह एक बहुत बड़ी संस्था के बड़े धार्मिक पुजारी की संत थे।

ऐसे संत जो धैर्य और कामना करने वाले थे और वे खुद अपनी जान ले लेंगे। यह एक आश्चर्यजनक बात है।

कौन-कौन आया पुलिस की हिरासत में

खुद मृत्यु को गले लगाने के तत्व सामने आए हैं। उन्होंने खुद की जान क्यों ली।

इस पर पूरी जांच हो रही है और इसी को लेकर पुलिस ने आगे कार्यवाही में जांच के दौरान ब्लैकमेलिंग के एंगल से की गयी है।

क्या कोई फोटो है जिसको लेकर नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल किया जा रहा था ?

अगर कोई ऐसा फोटो है तो वह कौन सा फोटो है जिसको लेकर आनंद गिरि को गिरफ्तार किया गया है।

उसके साथ ही मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया।

महंत गिरि की हुई मृत्यु पर संदेह :- खुद ली अपनी जान या किसी और ने ली

नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद पुलिस के पास जो वीडियो सामने आया है। वह खुद नरेंद्र गिरि नहीं बनाया है जिसमें वह फांसी का फंदा वो रस्सी नहीं दिख रही है ,

जिससे उन्होंने फांसी लगाई है। हालांकि इससे पूरी तरह यह नहीं कहा जा सकता है कि उन्होंने खुद ही अपनी जान ली है उनकी जान किसी और ने ली है।

यह भी बताया गया कि महंत गिरी 13 सितंबर को ही खुद की जीवनलीला समाप्त करना चाहते थे क्योंकि उनके कमरे से सल्फास की गोलियां बरामद हुई हैं।

इन गोलियों को जांच कर्मियों को सौंप दिया गया है। उनके सुसाइड नोट को भी एक्सपर्ट के पास भेज दिया गया है।

जब वहां से लौटकर आएंगे तब इस बात का खुलासा होगा कि यह नोट उन्होंने लिखा हुआ है या किसी अन्य ने लिखा है।

कहां से बरामद हुआ उनका पार्थिक शव ?

20 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे के आसपास नरेंद्र गिरि ने भोजन किया और वह अपने कमरे में आराम करने चले गए। वे 3:00 बजे के आसपास चाय पीते थे।

लेकिन उस दिन उन्हें चाय पीने के लिए पहले ही मना कर दिया था तथा उस दिन 3:30 बजे के आसपास में उनका दरवाजा खटखटाया गया। तब उन्होंने दरवाजा नहीं खोला।

हालांकि वहां एक बार में ही दरवाजा खोल देते थे और उसी दौरान उनका पार्थिक शरीर उनके कमरे से ही बरामद हुआ।

क्या है पोस्टमार्टम रिपोर्ट में

महंत गिरि की मौत की वजह पोस्टमार्टम में Asphyxia बताया गया है। इसका मतलब यह होता है कि कोई व्यक्ति सांस लेने में असमर्थ है

और वह सांस नहीं ले पा रहा है जिस कारण उसका दम घुट जाता है और उसकी मृत्यु होना निश्चित हो जाती है।

उनकी सास घुटने से मौत हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई अन्य तत्व सामने नहीं पाया गया जिससे यह निश्चित हो कि उन्होंने खुद ही अपनी जीवन लीला समाप्त की है बल्कि उनकी जान किसी और ने ले ली है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उनकी मृत्यु होती 20 सितंबर 3:00 बजे से लेकर 3:30 बजे के बीच हुई है।

क्या कहा गया सुसाइड नोट में

महंत नरेंद्र गिरि का 13 पन्नों का सुसाइड नोट जो पुलिस को बरामद हुआ। इस नोट मे एक मुख्य नाम जो रहा वह आनंद गिरि का रहा,ना की सिर्फ आनंद गिरि का, बल्कि ही मंदिर दो संत आद्या तिवारी और संदीप तिवारी यह तीनों शामिल हैं।

महंत नरेंद्र गिरि ने मृत्यु से पहले जो सुसाइड नोट लिखा है उसमें एक लड़की का जिक्र कर रहे हैं जिसमें कहा कि आनंद गिरि उनको ब्लैकमेल कर रहे थे।

एक लड़की का फोटो उनके साथ जोड़कर यह लड़की कौन है ? इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है।

परंतु इस नोट से यह स्पष्ट होता है कि कि अगर वह फोटो उनकी लड़की के साथ वायरल हो जाती तो वहां उनका संत के चरित्र पर एक दाग लग जाता। जिसके कारण उन्होंने अधिक सोच-विचार कर लिया

और वहां डिप्रेशन का शिकार हो गए और उन्होने खुद की जीवनलीला समाप्त करना ही अधिक उचित समझ लिया।

एक बड़ा खुलासा यह भी कहा जा रहा है कि महंत नरेंद्र गिरि लिखते-पढ़ते नहीं थे तो इतना 13 पन्नों का सुसाइड नोट किसने लिखा ?

हालांकि वह दस्तखत कर लेते थे और सुसाइड नोट को देखकर यह कुछ अनुमान भी लगाया कि यह नोट उनका खुद का लिखा भी हो सकता है।

हालांकि यहां राइटिंग एक्सपर्ट को सौंप दिया गया है। वहां इसकी जांच कर के ही खुलासा हो सकता है।

क्या रहा महंत गिरी और आनंद गिरी के बीच का विवाद-

आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि के पूर्व शिष्य है और शिष्य गुरु के बीच कुछ विवाद चल रहा था।

इसका खुलासा जांच कर्मियों ने किया है। एक संत होने के नाते महेंद्र गिरि खुद ही अपनी जान नहीं ले सकते हैं।

यहां जनता का कहना है सुसाइड नोट को देखते हुए और अन्य सबूतों को देखते हुए जो तत्व सामने आए हैं।

अभी तक उसका निष्कर्ष निकाला गया है कि गुरु और शिष्य के बीच जमीन को लेकर एक विवाद चल रहा था जो सुसाइड नोट में एक लड़की का जिक्र किया गया है।

यह स्पष्ट अनुमान है कि आनंद- नरेंद्र गिरि को एक लड़की को लेकर ब्लैकमेल कर रहे थे जिससे वह जमीन उनके नाम कर दें।

दूसरी ओर गुरु और शिष्य के बीच विवाद की एक बड़ी वजह यह भी बताया जा रही है कि

बड़े हनुमान मंदिर में चढ़ने वाले लाखों का चढ़ावा जो आनंद गिरि और नरेंद्र गिरि के बीच का विवाद माना गया है।

इसमें आनंद गिरि का ही नाम नहीं बल्कि बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी का आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी भी इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं।

कुछ समय पहले नरेंद्र गिरि ने आद्या तिवारी को छोटी-छोटी बात पर फटकार भी लगाई थी। उनका आपसी भी विवाद कुछ चल रहा था।

महंत गिरी के विवाद में होगी सीबीआई जांच

महंत गिरी की मृत्यु अनुचित तरीके से उनके कमरे मे मिला। इसके सनसनी से पूरा मठ आश्चर्य हो गया तथा इसकी जांच के लिए पहले एसआईटी को सौंपी गई थी।

परंतु अब राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से इसकी जांच सीबीआई कराने की सिफारिश की है तथा यहां पांच सदस्यों की सीबीआई कमेटी जांच करेगी।

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