नागा साधुओं का इतिहास क्या है ?

हम जब भी नागा शब्द सुनते हैं तो हमारे दिमाग में सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम आता है वह है कुम्भ। इस सबके अलावा उनका अपना अलग रूप हाथी घोड़ों के साथ आना।

उनको अपने अपने अंदाज में सजाना। वे अपने हथियार का प्रदर्शनी खुलेआम करते हैं।

नागा अपने संगठन को अखाड़ा कहते हैं। नागा साधुओं को यदि हम एक दृष्टि से देखें तो वे हिंदू धर्म के मठ के रूप में देखे जाते हैं। अपने शुरुआती काल में अखाड़ों की संख्या केवल 4 थी।

लेकिन बाद में वैचारिक मतभेद उबरने के बाद इनकी संख्या आज चार से बढ़कर 13 हो गई है। सभी अखाड़े अपनी अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।

अपने शिष्यों को दीक्षित करते हैं। अपने शिष्यों को तमाम तरह की उपाधियों से सुसज्जित करते हैं। एक तरफ सामान्य लोग पुण्य की इच्छा से संगम पर स्नान करने पहुंचते हैं।

वहीं दूसरी ओर नागा साधुओं का मानना है कि वे गंगा के पानी को साफ और स्वच्छ करने के लिए गंगा स्नान के लिए आते हैं। साधुओं का कहना है कि गंगा जब धरती पर आने के लिए तैयार नहीं थी।

तब नागाओं ने ही इस धरती को साफ किया है तब गंगा धरती पर आने के लिए तैयार हुईं।

अखाडों का इतिहास क्या कहता है ?

ऐतिहासिक तौर पर अगर हम देखें तो हिंदू मान्यताओं के अनुसार बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए आदि गुरु शंकराचार्य ने अखाड़ों का गठन किया था।

अपने कथन के विषय में आदि गुरु शंकराचार्य ने कहा था कि जो शास्त्र से नहीं मानेगा हम उसको शस्त्र से बनवाएंगे।

लेकिन इस संबंध में कोई पुख्ता सबूत किसी के पास नहीं है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने अखाड़ों का गठन किया था। आदि गुरु शंकराचार्य आठवीं और नवीन सदी के दौरान जीवित रहे थे।

लेकिन कोई कोई इतिहासकार अखाड़ों को इससे भी पुराना मानता है। भले ही आज सभी अखाड़े 13 अखाड़ों में विभक्त है।

लेकिन सामान्यता इन्हें तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। पहला शैव, जो लोग भगवान शिव की आराधना करते हैं

वे शैव अखाड़े से संबंध रखते हैं। वैष्णव अखाड़े जो लोग भगवान विष्णु की आराधना और पूजा करते हैं वे वैष्णव अखाड़े के अंतर्गत आते हैं।

तथा एक तीसरा अखाड़ा आता है उदासीन अखाड़ा यह अखाड़ा गुरु नानक से बहुत प्रभावित हैं और यह पंचतत्व यानी धरती आकाश अग्नि वायु जल की पूजा अर्चना करते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण अखाड़ों के नाम इस प्रकार हैं जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा ,दशनामी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा आह्वान अखाड़ा अटल अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा इन सभी अखाड़ों का इतिहास सदियों पुराना है

नागाओं को भले ही हिंदू धर्म का प्रतीक माना जाता है लेकिन बावजूद इसके इन अखाड़ों में आपस मेंसंघर्ष देखने को मिला है।

इन अखाड़ों में कई बार पहले स्नान को लेकर और कई बार तो तंबू को लेकर संघर्ष देखने को मिला है। एक बार कुंभ के मेले में भगदड़ मच गई थी तब अखाड़ा परिषद का गठन किया गया।

परिषद में सभी तेरह अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि इस परिषद में अपने-अपने अखाड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अखाड़ा परिषद देश में बाबाओं की सूची जारी करके यह बताता है कि कौन सा बाबा फर्जी है और कौन सा बाबा सच्चा है।

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