आईएएस अफसर इरा सिंघल के संघर्ष की कहानी।

इरा सिंघल की शिक्षा और परिवारिक जीवन-

इरा सिंघल का जन्म में मेरठ में हुआ था। उनके पिता का नाम राजेंद्र सिंघल तथा माता का नाम अनीता सिंघल है।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा मेरठ में ही सोफिया गर्ल्स कॉलेज से हुई। बाद में दिल्ली के लोरेटो कान्वेंट स्कूल में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

इरा स्कोलियोसिस से जूझ रही है जिसके कारण उनकी रीढ़ की हड्डी प्रभावित है और उससे बाज़ुओं की गति ठीक नहीं होती।

इसके बाद भी वह शिक्षा ग्रहण करने में इतनी रुचि रखती थी कि उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र प्रौद्योगिकी संस्थान से उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर ली। उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री प्राप्त की।

कहां से ली आईएएस बनने की प्रेरणा ?

इरा सिंघल ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वह छोटी थी तो कहीं भी राज्य में कर्फ्यू लगता था तो वहां अपने माता-पिता से पूछती थी कर्फ्यू कौन लगाता है ?

तब उनके माता-पिता इस सवाल के जवाब में कहते थे कि कफ्यू डीयम लगाता है।

तब से उनको डीएम बनने के लिए रूचि जागी और फिर उन्होंने इतनी मेहनत की कि वे डीएम बनकर ही मानीं और वहां विकलांग होकर भी यूपीएससी पास करके ही उन्होंने इतिहास रचा।

क्या था मामला परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति नहीं

2010 में राजस्व परिषद परीक्षा पास करने के बाद भी उनको अधिकारियों ने अयोग्य बताते हुए,

जैसे कि कोई चीज उठाना ,धकेलना आदि योग्यता के कारण उनको उनके पद पर कार्यरत नहीं किया।

इसका एकमात्र कारण इरा का स्कोलियोसिस रोग था इसके बाद पर भी इरा ने सफलता की आस नहीं छोड़ी।

वह केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में अपना मुकदमा दायर किया। 2014 में उनके पक्ष में ही आदेश पारित किया गया। वह 2014 में राजस्व परिषद में आईएएस के पद पर कार्यरत हैं।

सार्वजनिक जीवन

वह बचपन से ही कड़ी मेहनत और धैर्य से उन्होंने जीवन जिया। साथ में जब 2010 में परीक्षा पास करने के बाद भी उनको उनका पद नहीं मिला। इस दौरान भी धैर्य बनाए रखा।

उन्होंने एक साल तक स्पेनिश भाषा का अध्ययन किया और उसमें भी कामयाबी हासिल की। साथ ही उन्हें कैडबरी डेयरी मिल्क में प्रबंधक के तौर पर नौकरी की।

उसके बाद उन्होंने कोका कोला कंपनी में भी एक प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया और अपनी सेवाएं दीं।

एक लंबे इंतजार और मेहनत के बाद आखिरकार वह वर्तमान में आईएएस पद पर कार्यरत हैं।

ट्रोलिंग का भी शिकार हुई इरा सिंगल

आईएएस ऑफिसर इरा सिंघल अपने दिव्यांग होने के कारण अपने शिक्षा और व्यवसायिक जीवन में ट्रोलिंग का शिकार भी हुईं

लेकिन पढ़ाई में उनकी काफी रुचि थी और वह बचपन से ही इस पढ़ने मे तेज थी।

इस कारण उन्होंने अपना धैर्य नहीं छोड़ा और कड़ी मेहनत करती रहीं।

उनके दिव्यांग होने के कारण लोग उनका काफी मजाक नहीं उड़ाते थे क्योंकि यूपीएससी एक बहुत कठिन परीक्षा होती है। उसने अपने तीसरे प्रयास में यह परीक्षा पास की थी।

उन्होंने अपने एक इंटरव्यू बताया कि काफी लोग उनका मजाक उड़ाते थे। परंतु लोग यह भूल जाते हैं कि

मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है,

पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *