चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना कांग्रेस ने एक तीर से साधे कई निशाने

अरविंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच संघर्ष से पंजाब में जो पार्टी को नुकसान हुआ है

उसको खत्म करने के उद्देश्य से कांग्रेस ने अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया है। उनके फैसले से एक नहीं बल्कि कई निशाने सध गए।

उन्होंने अपने फैसले से न केवल आम आदमी पार्टी बल्कि अकाली दल को भी चौका दिया है।

यह बात तो ठीक है कि चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस की मजबूरी ही थी।

लेकिन कांग्रेस ने अपने परंपरागत वोट बैंक को यह संदेश देने की कोशिश की है कि कॉन्ग्रेस हमेशा अनुसूचित जाति जनजाति की ही समर्थक रही है।

यूपी पर भी निगाहें

कांग्रेस ने न केवल पंजाब बल्कि से उत्तर प्रदेश पर भी निशाना लगाया है।

कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर बसपा के वोट बैंक पर भी सेंध लगाने की कोशिश की है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें चरणजीत सिंह चन्नी फिलहाल भारत के सभी मुख्यमंत्रियों में एकमात्र मुख्यमंत्री हैं जो एससी समुदाय के हैं।

झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में आदिवासी समुदाय के मुख्यमंत्री तो है लेकिन अनुसूचित जाति का कोई मुख्यमंत्री किसी राज्य में नहीं है।

विपक्षी हैरान

साल 2015 में जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद देश के किसी राज्य में कोई ऐसी समुदाय का मुख्यमंत्री नहीं बना है।

यही कारण है कि कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को राज्य का मुख्यमंत्री बना कर सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास किया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंजाब में एससी समुदाय बहुतायत में है।

कांग्रेस के अलावा सभी विपक्षी दल जैसे अकाली दल, आम आदमी पार्टी और भाजपा इस वर्ग को अपनी ओर साधने जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं।

कठिन फैंसला

यदि हम बात करें तो पंजाब के फैसले का असर उत्तर प्रदेश पर भी हो सकता है क्योंकि कभी कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक रहे एससी समुदाय फिर से कांग्रेस से जुड़ सकता है।

पंजाब में भाजपा और अकाली दल अपना सीएम एससी का बनाने की बात कर रहे थे। वही आम आदमी पार्टी ने डिप्टी सीएम बनाने का वादा किया था।

ऐसे में कांग्रेस ने सीएम बना कर इन तीनों को धराशाई कर दिया है। पंजाब में जाट और सिक्खों का ही दबदबा रहता है।

और इन दोनों समुदायों को हटाकर अनुसूचित जाति को सत्ता की कमान देना कठिन फैसला है।

चरणजीत सिंह चन्नी के मजे आ गए

पंजाब हाईकमान ने पहले तो हिंदू को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था और

इसके लिए राहुल गांधी ने अंबिका सोने का नाम आगे किया था लेकिन अंबिका सोनी ने स्वास्थ्य का हवाला देकर मुख्यमंत्री बनने से इनकार कर दिया।

उनके बाद सुनील जाखड़ भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आ गए थे और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मुख्यमंत्री पद की होड़ में थे।

लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू ने इन दोनों के रास्ते में टांग अड़ा दी फेस चरणजीत सिंह चन्नी के मजे आ गए।

बसपा भी हैरान

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अनुसूचित जाति जनजाति वोट बैंक को साधने के लिए अकाली दल ने बसपा से चुनाव में गठबंधन किया है।

उधर कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बना कर मायावती का असर फीका करने का प्रयास किया है।

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