चक्रवात के नामों का निर्धारण कैसे और कौन करता है ?

पश्चिम बंगाल में हर साल चक्रवाती तूफान आते हैं और यहां अधिकतर भारत के पूर्वी स्थानों में तबाही मचाते हैं।

यह बात अधिकतर लोग जानते हैं कि भारत में अधिकतम पूर्वी तट से चक्रवात आते हैं। इसे उष्ण कटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है यानी ट्रॉपिकल साइक्लोन कहां जाता है।

कैसे होती है इसकी उत्पत्ति-

उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति दो प्रकार से होती है। वहां केवल जल के आधार पर होती हैं और जल का तापमान 27 डिग्री से अधिक होना चाहिए।

बंगाल की खाड़ी अरब सागर में जो दबाव का बनता है वह धीरे-धीरे चक्रवात का रूप धारण कर लेता है।

• अगर वर्तमान समय में इसकी रिपोर्ट पढ़ी जाए तो आप यहां जानेंगे कि वर्तमान समय में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का तापमान अधिक रहा है।

भारत में कैसे होता है इसका निर्धारण

हम लोग यह जानते हैं कि दुनिया को दो गोलार्थों में बांट कर देखा जाता है – उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध।

इस हिसाब से जो उत्तर की तरफ से तूफान आते हैं वह घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में आते हैं यानी एंटी क्लॉक वाइज तथा दक्षिणी क्षेत्र में तूफान आते है वह घड़ी की सही सुई की दिशा में बनते है यानी कि क्लॉक वाइज।

चूंकि भारत उत्तरी गोलार्ध में है इसलिए यहां आने वाले तूफान इसके विपरीत दिशा में बनते है यानी घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में।

लगभग 6 माह पहले जो भारत में तूफान आया था, उसको निवार नाम दिया गया था। इसको यह नाम ईरान ने दिया था।

हां, अब यह सोचने वाली बात है कि यह तूफान आ रहा है भारत में, यह भारत के तट पर आ रहा है और नाम दे रहा है ईरान। ऐसा क्यों?

देखें कैसे होता है चक्रवातों का नामकरण-

चक्रवातों को नाम देने का पहला कारण यह है कि हम लोगों को इसकी स्टडी करने में आसानी रहे।

और साल 2000 में करीबन मौसम विभाग के 8 देशों ने मिलकर इसका नाम तय करने का फैसला किया था।

यह देश थे भारत ,बांग्लादेश, म्यामार,ओमान, पाकिस्तान, थाईलैंड और श्रीलंका।

साल 2015 में इसमें 5 देश और जुड़े जिसमें ईरान, सऊदी अरब ,कतर ,यूएई और यमन देश शामिल हुए।कुल मिलाकर 13 देश हुए।

यह देश मिलकर 13-13 नामों की एक सूची बनाते हैं और जैसे ही कोई चक्रवात आता है

यह किसी भी देश में कोई तूफान आने का संशय होता है तो यह सूची एक अंग्रेजी के अल्फाबेट के हिसाब से देखा जाता है कि कौन से देश की बारी है।

यदि भारत की बारी है तो भारत द्वारा सुझाए गए नाम पर उस चक्रवाद का नाम रख दिया जाता है।

यह सूची पहले से तैयार होती है और 2004 से यह मौसम विभाग केंद्र से जारी किया जाता है।

यह हर देश में अपना एक मौसम विभाग केंद्र होता है। यहां भारत के नई दिल्ली में भी स्थित है।

कुछ समय पहले भारत में आए तूफान का नाम अम्पन थाईलैंड ने सुझाया था और यह नाम 64 नामों की सूची में दिया गया आखिरी नाम था।

क्योंकि पहले इसमें 8 देश शामिल थे। इसलिए हर देश से 8 नामों की सूची जारी करता था। परंतु इसमें से पांच देश और जोड़ने से 13 देश हो गए

इसलिए हर देश अब 13-13 नामों की एक सूची जारी करता है और हर देश के मौसम विभाग संस्थाओं के द्वारा जारी की जाती है।

हालांकि इससे पहले 1953 मे world meteorological organisation उष्णकटिबंधीय और चक्रवातों के नाम रखते थे।

इसमें एक खास बात यह होती है कि हिंद महासागर में उठने वाले तूफानों के नाम देते समय यह खास ध्यान रखा जाता है कि

इसमें उठने वाले तूफानों का अधिक महत्व रहता है क्योंकि यहां जातीय विविधता अधिक हैं जो नाम रखे जाएं वहां जाति धर्म और राजनैतिक से विरूद्ध न रहें।

किसी भी समुदाय संस्कृति के विरुद्ध नहीं होना चाहिए ताकि किसी भी नाम से किसी जाति के लोगों को ठेस ना पहुंचे।

• इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि नाम छोटा आसान और अंग्रेजी के 8 अल्फाबेट से अधिक का नहीं होना चाहिए।

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