खिलाड़ियों के साथ दोस्ताना नहीं बल्कि तानाशाही रवैया अपनाते हैं विराट कोहली

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली इस समय गर्दिश के दिनों से गुजर रहे हैं।

उन्होंने भारत के तरफ से तीनों फॉर्मेट में भारतीय क्रिकेट टीम का नेतृत्व किया है। लेकिन अब उन्होंने टी20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया है।

हो सकता है विराट कोहली ने बचे फार्मेट को बचाए रखने के लिए लिए ऐसा किया हो।

लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि विराट कोहली कैरियर का ढलान शुरू हो चुका है।

बीसीसीआई के सूत्रों के हवाले से आई खबरों के अनुसार विराट कोहली खिलाड़ियों के साथ बहुत ज्यादा अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। सूत्र ने और भी कई चौंकाने वाले तथ्य बताए

न्याय नहीं करते थे खिलाड़ियों के साथ

बीसीसीआई के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ना तो कोहली को अपनी टीम का सपोर्ट मिल पा रहा था और ना ही कोहली अपनी टीम को सपोर्ट करते हैं।

बताया जाता है कि एक कप्तान को अपनी कप्तानी में लचीलापन दिखाना चाहिए लेकिन कोहली के साथ ऐसा नहीं था। उनकी कप्तानी पर अब प्रश्न उठने लगे हैं ?

इसका कारण है उनके कई फैसले जैसे साउथहैंपटन में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप कि फाइनल में वे दो स्पिनरों के साथ मैदान पर उतरे।

वर्ल्ड कप 2019 में उन्होंने किसी खिलाड़ी को चौथे स्थान पर स्थापित नहीं होने दिया।

भारत ने इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज में 2-1 से बढ़त बनाई है लेकिन इस सबके बावजूद भी उन्होंने आर अश्विन को नहीं खिला कर आलोचकों को मौका दे दिया।

पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड टेस्ट में खेलते हुए भारत ने अपनी श्रेष्ठ टीम के साथ खेल खेला लेकिन भारतीय टीम केवल 36 रन पर सिमट गई

विराट कोहली पैटरनिटी लीव पर गए तो उसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम का हुलिया जैसे बदल गया हो भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया था।

नेतृत्व क्षमता नहीं है विराट कोहली में

विराट कोहली के विषय में कहा जाता है कि वे अच्छे कप्तान नहीं हैं। उनके साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उनका खिलाड़ियों के साथ कम्युनिकेशन गैप रहता है।

जबकि महेंद्र सिंह धोनी कप्तान थे तब वे हमेशा अपने खिलाड़ियों के लिए मौजूद रहते थे। कोई भी खिलाड़ी कमरे में कभी भी जा सकता था।

यहां तक यह भी देखा जाता था कि खिलाड़ी उनके कमरे में बैठकर खाना खा लेते थे। वीडियो गेम खेल लेते थे। और मौका मिलने पर क्रिकेट के बारे में बातचीत भी कर देते थे।

लेकिन बताया जाता है कि मैदान तक तो ठीक है लेकिन मैदान के बाद विराट कोहली से संपर्क कर पाना बेहद कठिन काम था।

एक पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि अगर हम देखें तो महेंद्र सिंह धोनी के बाद रोहित शर्मा ही एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनमें हम महेंद्र सिंह धोनी की झलक देख सकते हैं।

खिलाड़ियों से नरमी से बात करते हैं। खिलाड़ियों को अपने साथ खाने पर ले जाते हैं।

जब खिलाड़ी किसी तरह से हताश से निराश होते हैं तब उनका हौसला अफजाई करते हैं।

लेकिन विराट कोहली के मामले में ऐसा नहीं है खिलाड़ियों पर तानाशाही रवैया अपनाते हैं।

खिलाड़ियों पर नहीं देते ध्यान

एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि विराट कोहली के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अपने जूनियर खिलाड़ियों को बीच में छोड़ देते हैं।

एक अन्य खिलाड़ी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की कठिन पिचों पर एक मैच में 5 विकेट लेने वाले कुलदीप यादव भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर हैं।

ऋषभ पंत ऑट ऑफ फॉर्म थे तो उनको भी विराट कोहली ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

उमेश यादव भारतीय पिचों पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं और उन्होंने एक सवाल पूछा था कि जब तक भी चोटिल नहीं हो जाते हैं,

तब तक उनके नाम पर कोई विचार क्यों नहीं किया जाता ? उनके इस सवाल का अभी तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।

विराट कोहली पर है संकट

विराट कोहली ने अपना आखिरी शतक साल 2019 में लगाया था। विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी कप्तानी का असर उनके खेल पर भी पड़ने लगा है।

विराट कोहली को इस बात का अंदेशा है कि यदि उनकी टीम ने T20 वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो उन्हें टी20 की कप्तानी से हटाया जा सकता है।

इसीलिए उन्होंने पहले ही ट्वेंटी वर्ल्ड कप के बाद कप्तानी से हटने का एलान कर दिया।

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