हाईकमान के हस्तक्षेप से शांत हुई इस राज्य की उथल-पुथल

गुजरात के नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कल बुधवार को दोपहर 1:30 पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। मजे की बात तो यह है कि उनके मंत्रिमंडल में 22 मंत्री हैं और 22 के 22 मंत्री नए हैं।

पिछले कैबिनेट में करीब 24 मंत्री थे और उनमें से किसी को भी नई कैबिनेट में स्थान नहीं मिला है।

इस घटनाक्रम के बाद गुजरात का भाजपा में गृह क्लेश हो गई , जो दिन भर चलती रही।

इस घटना से गुजरात सरकार के पूर्व सीएम नितिन पटेल भी असंतुष्ट नजर आए। उन्हें इस बात की पहली आशंका थी कि उनका पद छीना जाएगा।

विजय रुपाणी भी घटनाक्रम से बेहद आहत और गुस्से में थे। पूरा दिन इसी गृह कलेश चलता रहा और फिर अंत में मामला दिल्ली पहुंच गया।

रूपाणी के जाने के बाद से ही असंतुष्ट हैं कुछ नेता

जिस दिन से भाजपा हाईकमान ने गुजरात के पिछले मुख्यमंत्री रुपाणी से उनका इस्तीफा लिया है।

तभी से रुपाणी के समर्थक कुछ नेता और मंत्री हाईकमान के फैसले से नाराज हैं।

खबर तो यह भी सुनने में आई है कि नितिन पटेल तो इतने खफा है कि उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला से मुलाकात की है।

पिछले कैबिनेट के करीब 7 से 8 मंत्रियों ने हाईकमान के फैसले पर खुलकर नाराजगी व्यक्त की है।

शाम तक होती रही खुशामदी

भाजपा हाईकमान ने गुजरात के संकट को निपटाने की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संतोष और गुजरात भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव को दी।

ये दोनों पदाधिकारियों ने सभी असंतुष्ट ओर से एक-एक करके बात की। और नितिन पटेल और भूपेंद्र सिंह को बुलाकर बातचीत की। यह बातचीत करीब 3 घंटे तक चली

इतना ही नहीं इन दोनों नेताओं ने विजय रुपाणी से भी फोन पर करीब 1 घंटे तक वार्ता की। लेकिन इतना सब होने के बाद भी बात नहीं बनी।

आखिरकार हार कर संतोष और भूपेंद्र यादव ने पार्टी हाईकमान से हस्तक्षेप की मांग की।

पार्टी हाईकमान ने इस मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद असंतुष्ट नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया गया कि यह फैसला हाईकमान का है।

आप अब पार्टी का काम करना शुरू कर दीजिए।

खबरों मैं तो यहां तक आया है कि पार्टी हाईकमान ने विजय रूपाणी को ही यह मामला शांत करने की जिम्मेदारी दे दी। फिर इसके बाद मामला ठंडा होता चला गया।

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