जानिए हमारे देश में सिंगल मदर को लेकर कानून क्या कहता है ?

बंगाल की अभिनेत्री और टीएमसी सांसद नुसरत जहान ने हाल ही में एक बेटे को जन्म दिया है।

उनके बेटे को जन्म देते ही समाज ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया है। लोग नुसरत जहां से अपने बच्चे के पिता का नाम पूछ रहे हैं।

नुसरत जहां ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने ट्रोलर्स को जवाब देते हुए कहा कि वे अपने बच्चे के पिता का नाम कभी नहीं बताएंगी।

वे सिंगल मदर बनना चाहती हैं। ट्रोलर्स ने उन पर भद्दे मीम बनाना शुरू कर दिए।

लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें किसी भी महिला के प्रति अगर आप इस तरह के मीम बनाते हैं तो आप यह अपराध कर रहे हैं।

अब हम बात करते हैं कि क्या भारत में सिंगल मदर मान्य है, तो जवाब है हां। भारत में सिंगल मदर को बहुत सारे अधिकार दिए गए हैं।

भारतीय कानून में यह व्यवस्था है कि यदि कोई महिला अपने बच्चे की सिंगल मां बनना चाहती है तो बन सकती है।

चाहे उस महिला की शादी हुई हो या ना हुई हो। वह तलाकशुदा हो या फिर विधवा हो।

एक मां को अपने बच्चे का संरक्षण करने का पूरा अधिकार हमारे संविधान ने उसे दिया है।

लेकिन हमारे समाज की संकीर्ण मानसिकता का उदाहरण नुसरत जहां का बेटा ईशान है।

नुसरत जहां ने जब से अपने बेटे को जन्म दिया है तब से लोग सोशल मीडिया पर नुसरत जहां से अपने बच्चे के पिता का नाम पूछ रहे हैं।

लोग सीधे-सीधे नुसरत जहां से शक जाहिर करते हुए बता रहे हैं कि यह यशदास गुप्ता तो उनके बच्चे के पिता नहीं।

तो इस तरह सवाल पूछने का कारण भी है क्योंकि नुसरत जहां की डिलीवरी से लेकर डिस्चार्ज होने तक यश दासगुप्ता ही नुसरत जहां के साथ देखे गए।

हमारे समाज की व्यवस्था ऐसी है कि यदि कोई महिला अपने बच्चे के साथ रहना चाहे तो लोग उससे उसके पति के बारे में बात करने लगते हैं।

उसने शादी नहीं की है तब लोग कहते हैं कि क्या आपने यह बच्चा गोद लिया है ?

कभी कोई सिंगल मदर की बात ही नहीं करता। तलाकशुदा या विधवा महिलाओं पर भी लोग उंगली उठाने लगते हैं।

यदि कोई महिला सिंगल मदर के रूप में जीवन जीना चाहे तो लोग तरह-तरह के सवाल करते हैं।

हम जिस समाज में जी रहे हैं ना वहां पर लोग हर कदम पर आप से सवाल करते हैं। आपके हर अच्छे बुरे निर्णय पर जज बन कर बैठ जाते हैं।

हमारे आसपास ऐसे लोगों की कमी नहीं होती जो दूसरों के जीवन में ताका झांकी करते रहते हैं तो सोचिए इस सिंगल मदर कैसे सुकून सकती ?

कानून क्या कहता है ?

समाज भले ही तमाम तरह की बातें करें लेकिन अगर कानून की कसौटी पर बात करें तो इन बातों का कोई मोल नहीं है।

हमारा कानून कहता है कि कोई भी महिला चाहे वह तलाकशुदा हो, विधवा हो या फिर बिन बिहाई हो। वह अपनी इच्छा अनुसार अपने बच्चों को जन्म दे सकती है।

स्पष्ट तौर पर अगर हम समझें तो कोई भी महिला सिंगिंग मदर बन सकती है।

किसी भी पुरुष को यह समाज के किसी व्यक्ति को उस महिला से अपने बच्चे के पिता के बारे में जानने का अधिकार नहीं है।

अभी फिलहाल केरल हाईकोर्ट ने एक बहुत अच्छा निर्णय सुनाया, इसमें कहा गया था कि यदि कोई कुंवारी महिला हो तो भी वह अपनी इच्छा के अनुसार जब चाहें मां बन सकती है।

किसी को यह अधिकार नहीं है कि उसके बच्चे से उसके पिता के बारे में बात करे। केरल हाई कोर्ट ने यह फैसला एक तलाकशुदा महिला की याचिका पर सुनाया था।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था समाज के किसी व्यक्ति को किसी महिला से उसके बच्चे के बारे में सवाल पूछने का अधिकार नहीं है।

यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो यह उस महिला और उसके बच्चे के सम्मान के विरुद्ध मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि ऐसे बच्चों के लिए अलग से जन्म वहां पत्र जारी किए जाएं।

वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक मामले में अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि पिता अपनी शर्तें अपनी बच्चे पर नहीं थोप सकता।

इसका मतलब यह है कि अगर कोई बच्चा अपनी मां का सरनेम लगाना चाहता है तो इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक फैसले में कहा था कि कोई भी संस्था या सरकार किसी महिला को इस बात के लिए बाध्य नहीं कर सकती कि वह किसी भी डॉक्यूमेंट में अपने बच्चे के पिता का नाम दर्ज करें।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि पूरे दुनिया यह जानती है कि मा ही अपने बच्चे की सर्वश्रेष्ठ अभिभावक है।

एकल मां के लिए अधिकार

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा कि यदि कोई किसी महिला से उसके बच्चे के पिता के बारे में पूछता है तो यह निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।

कोई भी सरकार या संस्था किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उसके बच्चे की पिता के बारे में नहीं पूछ सकती।

सर्वोच्च न्यायालय का कहना है जन्म प्रमाण पत्र पर भी पिता की पहचान बताना आवश्यक नहीं है।

हिंदू अल्पसंख्यक और अभिभावक अधिनियम 1956 नाजायाज बच्चों के प्राकृतिक के रूप में मां को ही सर्वोच्च मानता है।

मतलब साफ है कि पिता की मंजूरी के बिना भी एक अविवाहित मां अपने बच्चे की अभिभावक बन सकती है।

स्पष्ट शब्दों में अगर आप समझें तो अगर कोई अविवाहित महिला भी अपने बच्चे की मां बनती है तो उसके बच्चे का बाप कौन है किसी को यह पूछने का अधिकार नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट मैं बताया है कि भारत में लगभग 4.5 % परिवार सिंगल मदर के भरोसे ही चल रहे हैं यानी करीब 13 मिलीयन सिंगल मदर।

इतना पूरा आर्टिकल पढ़ने के बाद आप तो यह समझ ही चुके होंगे कि भारत में सिंगल मदर होना ना तो कोई बड़ी बात है न कोई खास बात।

यह तो आम बात है बस नुसरत जहां ने आपको याद दिलाया है कि महिलाएं सिंगल मदर के रूप में भी अपने बच्चे की अच्छी देखभाल कर सकती हैं।

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