आखिर सुबह के समय ही क्यों होते हैं हार्ट अटैक ?

भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आज हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

अगर विशेषज्ञों की मानें तो हार्ट अटैक की घटनाएं सबसे ज्यादा सुबह के समय देखने को मिलती हैं।

यहां तक बताया जाता है कि सुबह के समय का हार्ट अटैक बेहद खतरनाक होता है।

हार्ट अटैक की समस्या आज के दौर की एक बड़ी समस्या है। इस समस्या की सबसे गलत बात तो यह है कि यह समस्या कब पैदा होती है हमें इस बात की जानकारी नहीं हो पाती।

अभी कुछ दिन पहले सिद्धार्थ शुक्ला जो कि एक जाने-माने कलाकार थे उनकी भी हृदय गति रुकने से मौत हो चुकी है।

हमारे जेहन में कभी ना कभी इस तरह की बात तो आती ही होगी कि आखिर सुबह 6:00 बजे ऐसा क्या होता है कि इस तरह की घटनाएं सुबह 6:00 बजे ही घटती हैं ?

इस संबंध में स्पेन के विशेषज्ञों ने एक रिसर्च किया इसमें यह बात निकल कर आई कि सुबह 6 बजे का समय बेहद खतरनाक होता है।

बताया जाता है कि सुबह के समय होने वाली हार्ड अटैक से बचने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं।

सुबह ही क्यों आता है हार्ट अटैक

सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक हार्ट अटैक के मामले इसीलिए ज्यादा हानिकारक होते हैं क्योंकि इस समय पूरे दिन की तुलना में डेड बसल सेल 20% ज्यादा होते हैं।

आसान शब्दों में अगर हम कहें तो इस समय हमारे हृदय को ज्यादा काम करना पड़ता है। इसीलिए इस समय हमारा हृदय रक्त के थक्के जमा नहीं कर पाता है।

अगर हम थोड़ा संक्षेप में समझें तो हमारे शरीर में बॉडी ब्लॉक होता है जो कार्डियोवैस्कुलर वर्जीक्यूलर क्रियाओं को प्रभावित करती है।

यह प्रक्रिया तब ज्यादा प्रभावित होती है जब कोई भी इंसान नींद से तुरंत जागा हो।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हार्ट अटैक की घटना तब होती है जब कोरोनरी धमनी में किसी तरह की समस्या पैदा हो जाती है।

और इस कारण हृदय की मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण एक हिस्सा काम करना बिल्कुल बंद कर देता है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्केडियम प्रणाली को बॉडी क्लॉक के रूप में भी जाना जाता है।

बॉडी क्लॉक हमारे शरीर में होने वाली थकान, दिनभर जगाने और हमारे भावनाओं को नियंत्रित करने का कार्य करता है।

सुबह हार्ट अटैक आने के कारण

अरे मामलों के विशेषज्ञ डाक्टर शीर बताते हैं कि सर्केडियम प्रणाली की बॉडी क्लॉक ही सुबह हार्ट अटैक का कारण बनता है।

बताते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति एक तरह के ही वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर रहा हो, फिर भी ऐसे पैरामीटर्स में 24 घंटे के अंदर उत्पन्न हो जाते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्केडियम प्रणाली हमारे शरीर की एक आंतरिक घड़ी की तरह होती है जो हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं को नियंत्रित रखती है।

डॉक्टर शीर कहते हैं कि यह सिस्टम साइटोलॉजिकल पैरामीटर को चलाती है।

इस घटना के दौरान हमारे शरीर को यह कभी-कभी संवेदनशील बना देती है जिसका हमारे शरीर पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर अगर हम बात करें तो सुबह के समय ह्रदय रक्त के थक्के को जमाने की अपनी क्षमता को खत्म कर देता है।

जिस वजह से सुबह के समय ही हार्ट अटैक की समस्याएं ज्यादा होती हैं।

हार्ट अटैक से बचने को क्या करें

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति को अच्छी नींद नहीं आती है या फिर वह देर रात तक ज्यादा देर तक जागता है। तब उस हार्ट से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।

ऐसे में सभी को सलाह देते हैं कि रात को सोते समय सोशल मीडिया और खबरें नहीं पढनी चाहिए। रात को सोने जाते समय शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन न करें।

यदि आपको कम नींद आने की समस्या है तब आपको चाहिए की ज्यादा से ज्यादा एक्सरसाइज करें इसके साथ ही अपने वजन को बढ़ने से रोकना चाहिए।

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