सेक्स लाइफ :- सामाजिक बंदिशों को तोड़ने में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं

एक जमाना था जब सेक्स को लेकर हमारे समाज में एक ही तरह की सोच व्याप्त थी लेकिन अब विविधता दिखाई देती है।

इस जमाने में इसे चुपचाप और ढक्कन की चीज माना जाता था। अब खुलापन दिख रहा है।

किसी जमाने में इस बात पर चर्चा करना बेहूदा और वेशर्मी माना जाता था लेकिन अब हमारा समाज इस तरह की रूढ़ियों से ऊपर उठ रहा है। अब हर कोई अपने बारे में खुलकर बात कर रहा है।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सेक्सुअलिटी पर बात करने में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं हैं।

पिछले एक दशक में महिलाओं ने अपनी अच्छी बुरी बातों पर खुलकर बात की है।

कई विशेषज्ञों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि लंबे समय से हमारे समाज से संकीर्णता बाहर निकल रही है।

महिलाएं लिंग के आधार पर खींचा गया अपना खांचा लांग कर बाहर आ रही हैं।

बदलाव की बयार

सीन मैसी जो बिंघमटन ह्यूमन सेक्सुअलिटी रिसर्च लैब में सेक्सुअलिटी पर अपना अध्ययन कर रहे हैं।

इस अध्ययन पर काम करने वाले शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों से उनके अपने सेक्सुअलिटी पर खुलकर बात करने के लिए कहा।

शुरुआत में तो जब उन्होंने आंकड़े इकट्ठे करने शुरू किए तब तो इस बात पर इतना ध्यान नहीं दिया।

लेकिन बाद में उन्होंने इस बात पर गौर किया कि सेक्सुअलिटी पर खुलकर बात करने में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं आगे आ रही हैं।

प्रोफेसर मैसी आगे बताते हैं कि साल 2011 से 2019 के बीच कॉलेज जाने वाली महिलाओं सिर्फ विपरीत सेक्स के प्रति दिखने वाली आकर्षण से बाहर आने का प्रयास किया।

जहां साथ 2019 में 65% महिलाओं में बताया कि वे पुरुषों के प्रति आकर्षित हैं इससे पहले साल 2011 में 77 % महिलाओं ने यह बताया कि वे पुरुषों की तरफ आकर्षण महसूस करती हैं।

आप देखेंगे तो आपको 12% का अंतर दिखाई देगा। ब्रिटेन और नीदरलैंड समेत दुनिया के बहुत सारे देशों में सर्वे किए तो वहां पर चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।

इन नतीजों में बताया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने इस बात पर खुलकर बात की कि वे अपने होमोसेक्स के प्रति भी आकर्षक महसूस करती हैं।

शक्ति और स्वतंत्रता

मेसी और उनकी टीम ने जब इस पर विस्तार से बात की। तब उन्होंने कहा कि या तो यह बदलाव सांस्कृतिक रूप से आए हैं या फिर नारीवाद और महिला मूवमेंट में बदलाव के कारण।

लेकिन यह बदलाव वाकई चौकानेवाले हैं। इन बदलावों ने ऐसा नहीं है कि महिलाओं को ही प्रभावित किया है।

इसने पुरुषों की सोच पर भी अपना गहरा प्रभाव डाला है। लेकिन महिलाओं को इन बदलाव में ज्यादा प्रभावित किया।

इसी बदलाव का असर है कि लोग अपनी वास्तविक स्थिति जैसे लैसबियन गे बायो सेक्सुअल या ट्रांसजेंडर पर खुलकर बात कर रहे हैं। वह अपनी पहचान बताने से जरा भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।

मेसी का मानना है कि नारीवाद का इस पर प्रभाव पड़ा है। आज पुरुषों और महिलाओं की तुलना की जाए तो महिलाएं इस पर खुलकर बात कर रही हैं।

आप आज से करीब 30 साल पहले की कल्पना करें तो महिलाओं को एक पुरुष से ही शादी करके घर में बसाना होता था। महिला को एक पुरुष की जरूरत के तौर पर देखा जाता है।

महिलाओं की जागरूकता और आजादी पर जिस तरह से अभियान चलाए गए हैं। उससे वे स्वतंत्रता हासिल करने में कामयाब रही हैं।

खुलकर बात

जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ा है वैसे वैसे महिलाओं ने अपने यौन बर्ताव पर खुल कर बात करना शुरू कर दिया है। वे संभोग के दौरान अपनी पसंद और खुशी पर खुल कर बात कर रही हैं।

अमेरिका की प्रोफेसर दिशा डायमंड है जो यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा में मनोविज्ञान की प्रोफेसर हैं, उन्होंने संभोग के प्रति महिलाओं और पुरुषों पर अध्ययन शुरू किया। लेकिन उनके संपर्क में पुरुषों से ही ज्यादा था।

और कुछ तो गे सपोर्ट ग्रुप के मेंबर भी थे। पुरुषों तक तो पहुंचना आसान था लेकिन प्रोफेसर डायमंड महिलाओं के बारे में जानकारी हासिल करना चाहते थे।

धीरे-धीरे उन्होंने अपने सर्वे में 1 साल में करीब 100 महिलाओं पर अध्ययन किया।

उनके सेक्स रुझान और जो बातचीत हुई थी। उन्होंने इस संबंध में किताब भी लिखी है

जिसका नाम है सेक्सुअल फ्लूइडिटी : अंडरस्टैंडिंग वूमेन्स लव एंड डिजायर। इस किताब का प्रकाशन साल 2008 में हुआ था।

इस किताब में महिलाओं के व्यवहार पर खुलकर बात की गई है। यह किताब रूढ़िवादी सोच से अलग विचारों की किताब है।

डायमंड की यह किताब जैसे ही मार्केट में आई। उसी दौरान ही सिंथिया निक्सन और मारिया बैलो जैसी अमेरिकन ने महिलाओं के प्रति आकर्षण पर खुलकर बात की।

उन्होंने बताया कि वे अपने जीवन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के साथ भी डेट पर जा चुकी है। ओप्रा विनफ्रे ने प्रोफेसर डायमंड को अपने शो पर आमंत्रित किया।

एक जमाना था जब यह माना जाता था कि या तो पुरुष विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित होंगे नहीं तो फिर वे गे होंगे। लेकिन महिलाओं के लिए किसी भी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।

ऐसा कहता अब एक मान्यता आम है कि इस संसार में हर कोई व्यक्ति समलैंगिक है।

 

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