सुपर मारिओ की दिलचस्प कहानी जिसने करोड़ो दिलों पर किया था राज

 

वैसे तो यह गेम किसी पहचान की मोहताज़ नहीं , ९० के दशक का दौर था वीडियो गेम का नया नया प्रचलन शुरू हुआ। जिसमे से एक विश्व प्रसिद्ध हुई

” सुपर मारिओ ” वीडियो गेम। जिसे बच्चे सारा दिन टीवी में लगा कर खेलते रहते थे।

जिस चालाकी से वो गेम के नए लेवल पार करता था जैसे सुरंग में चले जाना, उछल कूद करना और सबसे खास अपनी जान पर खेलकर राजकुमारी को बचाना, तभी बच्चों के साथ साथ हर उम्र के लोग इसके दीवाने थे।

इसीलिए आज भी वीडियो गेमों की सूचि में “मारियो” एक खास स्थान रखता है और इस गेम ने उस जमाने में वीडियो गेम की परिभाषा ही बदल डाली।

जिसकी वजह से विडियो गेम कंपनी ‘निनटेंडो’ (Nintendo) को एक अलग ही पहचान मिली।

 

कुछ इस तरह हुई विश्व प्रसिद्ध गेम की शुरुआत

1970 का दौर था और वीडियो गेम की तरफ लोगो का ध्यान जाने लगा। सबसे ज्यादा वीडियो गेम का प्रचलन अमेरिका में हुआ।

वीडियो गेम के प्रति सबसे ज्यादा दीवानापन अमरीकियों में देखने को मिला।

जिसकी तर्ज़ पर एक जापानी वीडियो गेम कंपनी निनटेंडो (Nintendo) ने भी विडियो गेम इंडस्ट्री को बढ़ाने की पहल की ,

और अपने प्रसिद्ध वीडियो गेम ‘राडार स्कोप’ के 3000 मॉडल अमेरिका भेजे। ताकि, वहां की वीडियो गेम इंडस्ट्री में अपना पैर जमा सके।

किन्तु ऐसा हुआ नहीं अमेरिका के लोगो को ये गेम ज्यादा पसंद नहीं आया और उन्होंने लगभग 2000 मॉडल वापिस कंपनी को भेज दिए।

इनकी पहली कोशिश नाकाम जरूर रही लेकिन हौसला अभी भी बुलंद था और

फिर उन्होंने ऐसा गेम बनाना शुरू किया जो ना सिर्फ जापान के लोगों बल्कि, अमेरिका के लोगो के दिलों में भी अपनी जगह बना सके।

निनटेंडो कम्पनी को ये गेम बनाने की प्रेरणा पोपाई नाम के एक चर्चित अमेरिकी कार्टून से मिली जिसमें पोपोई अपनी गर्लफ्रेंड ऑलिव को, ब्लूटो नाम के एक गुंडे से बचाया करता था।

कम्पनी ने पोपाई जैसा ही एक किरदार तैयार किया जो कारपेंटर जैसा दिखता था।

मारिओ को पहले जम्पमैन के नाम से जाना जाता था,

जो इसका असली नाम था। तो आइये जानते हैं की जम्पमैन का नाम मारिओ कैसे रखा गया।

आइये जानते है कैसे एक बिज़नेसमैन के नाम पर पड़ा मारियो नाम

‘डॉकी कॉन्ग’ (Donkey Kong) नाम की गेम से हुई थी मारिओ की शुरुआत। जैसे पोपाई अपनी गेम में अपनी गर्लफ्रेंड को गुंडों से बचाता था

मारिओ भी वैसे ही एक विशालकाय बंदर के चुंगल से अपनी गर्लफ्रेंड को बचाता था। शुरू में यह गेम पसंद नहीं किया गया

लेकिन धीरे धीरे यह सबकी पसंद बनने लगा और और प्रसिद्ध वीडियो गेमों में अपना नाम शामिल कर लिया।

हालाँकि जब गेम को रिलीज़ किया गया तो लोगों को मारियो का किरदार तो पसंद आया लेकिन जो उसका नाम जम्पमैन था वो कुछ ख़ास पसंद नहीं आया।

फिर सभी उसका नया नाम सोचने लगे और इसी बीच अमेरिकी ब्रांच से निनटेंडो को जम्पमैन का नया नाम मिल गया।

हुआ ये की जब कम्पनी के लोगो का ध्यान ऑफिस के मालिक पर गया जिसकी वेशभूषा जम्पमैन से काफी मिलती जुलती थी।

उसका नाम था मारियो सीगल और फिर कम्पनी के कर्मचारियों ने जम्पमैन को मारियो बुलाना शुरू कर दिया जो बाद में काफी प्रसिद्ध हुआ।

इसके पीछे ये वजह थी की ये नाम बहुत ही सिंपल और बोलने में आसान था और धीरे धीरे ये नाम सबकी जुबान पर आ गया और कम्पनी ने बिना सोच विचार के उसका नाम जम्पमैन से मारिओ रख दिया।

उस दिन के बाद फिर इस नाम ने वीडियो गेम्स इंडस्ट्री में एक अलग ही पहचान बनाई।

मार्केट में एंट्री करते ही बिखेरा अपना जलवा

निनटेंडो की चार साल की मेहनत के बाद ‘डॉकी कॉन्ग’ (Donkey Kong) गेम के बाद एक धमाकेदार वीडियो गेम ‘ सुपर मारियो ब्रोस (Super Mario Bros) नाम से मार्किट में उतारा ,

इसमें भी मारिओ राक्षसों से अपनी गर्लफ्रेंड को बचाता था। लेकिन इसमें दिलचिप्स बात ये है की इसमें बहुत से लेवल है।

हर लेवल के बाद गेम और भी मुश्किल और दिलचिप्स हो जाती थी, नयी नयी चुनौतियों का सामना करना होता था और यही इस गेम को रोमांचित करने वाली खासियत थी।

जिसकी वजह से जापान ही नहीं अमेरिका में भी इसने अपनी छाप छोड़ी।

इस गेम से लोगो को इतना गहरा लगाव हुआ की लोगो को इससे दूर करना मुश्किल था।

और यही इस गेम को और ज्यादा रोमांचिक बनाती थी। लेवल पास करने के चक्कर में लोग इसे बार बार खेलते थे। बच्चो के साथ साथ उस समय के बड़े भी इसे खूब पसंद करने लगे थे।

जापान और अमेरिका में यह बहुत प्रसिद्ध हुआ और साथ साथ भारत समेत काफी देशो में चर्चित हुआ और बच्चो का प्रिय खेल बना।

अपनी लोकप्रियता से रच दिया इतिहास

९० के दशक में जब ये भारत आया तो हर घर में मारियो ने अपनी एक अलग ही जगह बना ली और सभी के जुबान पर इसका नाम चढ़ गया।

इसकी लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है की उस समय में इसके आलावा कोई और गेम प्रसिद्ध नहीं हुआ।

इसकी लोकप्रिय का आंकलन आप इस बात से कर सकते है की इसकी 40 मिलियन कॉपी बेच दी थी।

और वीडियो गेम की दुनिआ में अलग ही इतिहास बना।

मारिओ को सिर्फ एक किरदार के रूप में नहीं बल्कि एक आइकोनिक गेम के रूप में याद किया जाता है इतना ही नहीं, 10 मार्च को नेशनल मारियो डे के रूप में मनाया जाता है।

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