कल्याण सिंह का जीवन परिचय

 

रसायन के इस्तेमाल से पहले उसे रासायनिक प्रयोगशाला में प्रयोग किया जाता है। वैसे ही यूपी भी राजनीति की प्रयोगशाला है। यहां रोज नए-नए एलिमेंट्स बनते रहते हैं।

इसी प्रयोगशाला से निकला था,ऐसा सेल्फ रनेंस एसिड जो दूसरे पर गिरे तो जला दे और खुद पर गिरे तो गला दे।

बात कर रहे हैं कल्याण सिंह की, जो उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे।

बात जब राजनीति की होगी वह कभी नहीं भुलाए जाएंगे। जो एक समाज सेवक और क्रांतिकारी नेता के रूप में सदैव याद रहेंगे।

5 जनवरी 1932 से लेकर 23 अगस्त 2020 तक का सफ़र कुछ इस प्रकार से रहा।

*जीवन परिचय –

कल्याण सिंह का जन्म पांच जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में हुआ था। कल्याण सिंह बीए एल.टी. हैं। वे डीएस डिग्री कॉलेज अलीगढ़ उत्तर प्रदेश से शिक्षित है।

उनका विवाह वर्ष 1952 मे रामवती नाम की महिला के साथ हुआ था। विवाह के समय वह केवल 20 साल के थे।

जिससे उनके दो बच्चे थे एक पुत्र और एक पुत्री। उनके बेटे राजवीर सिंह संसद का सदस्य हैं।

जिनकी चार संतानें हैं। सादा जीवन उच्च विचार की जब बात आएगी कल्याण सिंह की याद आएगी।

सादगी की बात करें तो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह एक ऐसे नेता रहे जो सत्ता में होने के बाद भी अपनी थाली में चटनी रोटी रखते थे। एक छाछ का गिलास और वह सब खुद ही बनाते थे।

वह हर व्यक्ति से सादगी से मिलते थे और कोई भी स्पेशल उनसे मिलने जाता था तो वह सादगी से उससे मिलते थे।

जलपान पूछ कर उसका स्वागत करते थे और उनके साथ हर कोई सादगी का एहसास करता था।

वह सर्वप्रथम राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ सेवक से जुड़े और समाज के प्रति रुझान होने के कारण समाज सेवा में अपना कदम रखा और इसके बाद से ही जनसंघ की राजनीति में सक्रिय हुए।

वह पहली बार 1967 में जनसंघ के टिकट पर अलीगढ़ जिले की अतरौली सीट से विधानसभा सदस्य चुने गये। इसके बाद 2002 तक वह 10 बार विधायक के रुप में कार्यरत रहे।

बात हो जब राजनीति की तो कल्याण सिंह सदैव ही याद रहेंगे। फिर चाहे वह उत्तर प्रदेश हो या हिमाचल प्रदेश ,राजस्थान।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा था जहां जब कल्याण सिंह की तूती बोलती थी।

लेकिन एक कहावत कही जाती है कि शोहरत हासिल करना जितना मुश्किल होता है उससे कई ज्यादा उसे बनाए रखना मुश्किल होता है।

ऐसे ही कुछ हुआ कल्याण सिंह के साथ भी। उन्होनें अपने पद को अपना घमंड बना लिया।

सुर्खियों में आया कि कल्याण सिंह ने अटल बिहारी वाजपेई को यह तक बोल दिया कि पहले एमपी तो बन जाये फिर ही तो पीएम बनेंगे।

*राजनीतिक जीवन-

कुछ इस तरह से कि कल्याण सिंह ने राजनीति की शुरुआत-

*पहली बार वर्ष 1967 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य के रुप मे कार्यरत हुए और वर्ष 1980 तक सदस्य रहे।

*जून 1991 में, बीजेपी को विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर के कल्याण सिंह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये।

*सर्वप्रथम 225 में 221 सीटों में जीत हासिल करने के बाद सन् 1992 मे एंटी कॉपी एक्ट लागू किया ।

*परंतु जहां बाबरी मस्जिद का विवाद उत्पन्न हुआ बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हिंदु नेता के तौर पर उभरे थे।

कल्याण सिंह ने 6 दिसंबर 1992 को राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

*वर्ष 1997 में, वह फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने और वर्ष 1999 तक पद पर बने रहे।

*इसी दौरान भाजपा पार्टी से मतभेद होने के कारण कल्याण सिंह ने भाजपा से त्यागपत्र दे दिया राष्ट्रीय क्रांति पार्टी’ का गठन किया।

*वर्ष 2004 के आम चुनावों में, वह बुलंदशहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद नियुक्त किए गए।

इसी दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अनुरोध पर,भाजपा सरकार में वापसी की।

*वर्ष 2009 में वह बीजेपी से पून अलग हुए और स्वतंत्र निर्वाचक उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल करें और इसी वर्ष समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।

*वर्ष 2013 में, वह पुनः भाजपा में शामिल हुए। 4 सितंबर सन 2014 को वहां राजस्थान के गवर्नर नियुक्त हुए।

*28 जनवरी 2015 को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण और 12 अगस्त 2015 तक राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

कल्याण सिंह ने अपनी राजनीति के दौर पर कुछ ऐसे परिवर्तन किया। जिससे वह जनता को सदैव याद रहेंगे।

वीआईपी कल्चर के खिलाफ किए गए फैसलों के कारण वह सदैव याद किए जाएंगे।

सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान राज्यपाल के आगे लगने वाला महामहिम शब्द हटवाकर इसकी जगह माननीय शब्द करवा दिया था।

राज्यपाल को जयपुर से बाहर जाने पर दिया जाने वाला गार्ड ऑफ ऑनर भी उन्होंने बंद करवा दिया।

राजस्थान को 16 साल बाद मिले थे 5 साल कार्यकाल पूरा करने वाले राज्यपाल।

विश्वविद्यालयों में 26 साल बाद दीक्षांत समारोह हर वर्ष करवाने की शुरुआत भी।

कल्याण सिंह की विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं से लेकर उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन शीघ्र ही काम करवाने के पक्ष में रहे।

वर्ष 1992 को जो बाबरी मस्जिद विवाद उत्पन्न हुआ उसमें उनकी भूमिका न भूलने वाली है। राममंदिर आंदोलन में आगे रहे।

कल्याण सिंह की पहचान कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी रामभक्ति के प्रतिअपना सर्वस्व निछावर कर देने वाले यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपने संघर्ष के बल पर यूपी में पहली बार भाजपा की सरकार बनाई।

राम के नाम पर साल भर के भीतर सरकार भी चली गई। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिया।

अंतिम विदाई –

बाबूजी के नाम से मशहूर राजनीतिज्ञ कल्‍याण सिंह जी का 21 अगस्‍त 2021 को 89 साल की उम्र में लखनऊ में निधन हो गया। पिछले कुछ माह में उनकी हालत बिगड़ती-सुधरती रही।

इससे पहले वह लोहिया अस्पताल में भी कुछ समय एडमिट रहे पर बीजेपी सरकार ने उनको और सहूलियत देकर उनको पीजीआई में एडमिट करवाया।

जहां से उनके शरीर के कुछ अंग काम ना करने की वजह से उनका निधन हो गया।

उनके पार्थिक शरीर को 24 अगस्त 2021 बुलंदशहर में सोमवार को अंतिम विदाई दी।

जब तक सूरज चांद रहेगा, बाबू जी का नाम रहेगा- इस नारे से उनके दिग्गजों ने उनको श्रद्धांजलि दी। भाजपा सरकार को आगे बढ़ाने में कल्याण सिंह की मुख्य भूमिका रही है।

उनके निधन पर यह बीजेपी सरकार ने मुख्य निर्णय लिया है कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को और जाने वाले मार्ग समेत छह जिलों में कल्याण सिंह के नाम पर छः सड़कें होगी।

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